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मुरादाबाद में 11वां तेंदुआ पिंजरे में कैद, 4 मौतों के बाद दहशत बरकरार; बलिया समेत आसपास के गांवों में आदमखोर का खौफ

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित लोगी खुर्द में वन विभाग के पिंजरे में एक और तेंदुआ कैद हो गया. जिले में अब तक 11 तेंदुओं (ठाकुरद्वारा से 10, कांठ से 1) का रेस्क्यू हो चुका है. हमलों में 4 मौतें और एक दर्जन से ज्यादा घायल होने के कारण ग्रामीणों में अब भी दहशत है.

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में तेंदुए का आतंक लगातार चिंता का कारण बना हुआ है. इस बीच ठाकुरद्वारा क्षेत्र के लोगी खुर्द गांव में वन विभाग के लगाए पिंजरे में एक और तेंदुआ कैद हो गया. तेंदुआ पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है. इसके साथ ही जिले में अब तक 11 तेंदुओं का रेस्क्यू किया जा चुका है.

वन विभाग के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए 11 तेंदुओं में 10 तेंदुए ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र से और एक तेंदुआ कांठ तहसील क्षेत्र से पकड़ा गया है. लोगी खुर्द में तेंदुआ पकड़े जाने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए.

हालांकि, तेंदुआ पकड़े जाने के बावजूद ग्रामीणों का डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में अभी भी कई तेंदुए घूम रहे हैं. खासकर बलिया गांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर लोगों में दहशत बनी हुई है. ग्रामीण खेतों की ओर जाने और अकेले बाहर निकलने से भी बच रहे हैं.

मुरादाबाद के ग्रामीण इलाकों में तेंदुए के हमलों की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. तेंदुए के हमलों में अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. लगातार हो रहे हमलों के बाद वन विभाग की टीमें अलग-अलग इलाकों में पिंजरे लगाने और तेंदुओं की निगरानी में जुटी हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि केवल तेंदुओं को पकड़ना ही नहीं, बल्कि उन इलाकों में लगातार निगरानी भी जरूरी है जहां तेंदुओं की गतिविधियां सामने आ रही हैं. लोगों की मांग है कि वन विभाग बाकी तेंदुओं को भी जल्द से जल्द रेस्क्यू करे, ताकि ग्रामीणों को दहशत से पूरी तरह निजात मिल सके.

अब तक 11 तेंदुओं का रेस्क्यू
ठाकुरद्वारा से: 10 तेंदुए
कांठ से: 1 तेंदुआ
तेंदुए के हमलों में मौत: 4
घायल: एक दर्जन से ज्यादा

वन विभाग की ओर से तेंदुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए गए हैं और संवेदनशील इलाकों में निगरानी की जा रही है. हालांकि ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि इलाके में घूम रहे बाकी तेंदुओं को कब तक पकड़ा जाता है.

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