महिदपुर रोड। श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा ने गुरुवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में परमात्मा और धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा रखी जाए तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। जहां चाह होती है, वहां राह भी निकल आती है। परमात्मा की कृपा से ‘असंभव’ भी ‘संभव’ हो सकता है।
चार कषायों का त्याग जरूरी
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने प्रवचन में उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के बाद ही उसमें बीज बोया जा सकता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने भीतर मौजूद चार प्रमुख कषायों—क्रोध, मान, माया और लोभ—का त्याग करना आवश्यक है।
इन कषायों का त्याग कर सच्ची श्रद्धा, आस्था और विश्वास के साथ अपने जीवन को संस्कारित और उपजाऊ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य के भीतर परमात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा उत्पन्न नहीं होगी, तब तक आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता।
सच्ची श्रद्धा से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त
साध्वीश्री ने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा, “श्रद्धा साची आवे, भव तीजे मोक्ष सीधावे।” अर्थात परमात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा जागृत होने पर मनुष्य मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर हो सकता है।
उन्होंने धर्म और परमात्मा के प्रति विश्वास को जीवन की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाती है और उसे आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
धार्मिक भक्ति और प्रभावना का आयोजन
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि गत दिवस की धार्मिक भक्ति प्रभावना का लाभ राहुल कुमार पारसमल बोथरा परिवार ने लिया। वहीं गुरुवार को आयोजित धार्मिक भक्ति प्रभावना का लाभ राजेंद्र कुमार मनोहर लाल डूंगरवाल परिवार द्वारा लिया गया।
गत दिवस की प्रभावना का लाभ प्रकाशचंद, रमेशकुमार एवं राहुलकुमार रांका परिवार, गड़ां वालों द्वारा लिया गया।
धर्मसभा और संपूर्ण मंगलमय आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने भाग लिया। क्षेत्रीय विधायक एवं जैन समाज गौरव दिनेश जैन बॉस भी उपस्थित रहे और उन्होंने धर्मसभा में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।

