अहमदाबाद। अहमदाबाद महानगरपालिका के फायर विभाग में रिश्वत के चर्चित मामले में गिरफ्तार किए गए मुख्य फायर अधिकारी अमितकुमार आनंद राव डोंगरे और उनके प्रशासक भावसिंह झाला की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विशेष एसीबी अदालत ने दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद दोनों आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक वरिष्ठ अधिकारी अकेले ही फायर एनओसी से जुड़े इतने बड़े कथित भ्रष्टाचार के खेल को चला रहा था, या फिर उसके पीछे किसी बड़े अधिकारी अथवा प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण था।
बड़े लोगों का हाथ ऊपर हो तो ही अधिकारी इतनी हिम्मत कर सकता है?
रिश्वत मामले में कार्रवाई के बाद एसीबी ने डोंगरे के घर पर भी छापेमारी कर कंप्यूटर सहित अन्य सामान जब्त किया है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि डोंगरे कथित तौर पर किसके इशारे पर काम कर रहा था और फायर एनओसी से जुड़े मामलों में उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े थे।
सामान्य नागरिकों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि महानगरपालिका के फायर विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग के प्रमुख पद पर बैठे अधिकारी द्वारा कथित तौर पर अकेले इतने बड़े स्तर पर रिश्वत का नेटवर्क चलाना कितना संभव है।
यदि जांच को गहराई से आगे बढ़ाया जाता है तो डोंगरे को कथित भ्रष्टाचार करने की छूट किस स्तर से मिल रही थी और उसके पीछे किसका संरक्षण था, इसकी जानकारी सामने आ सकती है।
36 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप
मामला अगस्त 2026 का बताया जा रहा है। शहर की करीब छह अलग-अलग इमारतों के लिए फायर एनओसी मंजूर की जानी थी। आरोप है कि इन मंजूरियों के बदले मुख्य फायर अधिकारी अमित डोंगरे की ओर से 36 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी।
इस शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान मुख्य फायर अधिकारी अमित डोंगरे और उनके प्रशासक भावसिंह झाला को कथित तौर पर रिश्वत के मामले में रंगे हाथों पकड़ा गया।
कार्रवाई की खबर सामने आते ही अहमदाबाद महानगरपालिका के प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया था।
घर पर भी छापेमारी, कंप्यूटर समेत सामान जब्त
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए डोंगरे के घर पर भी छापेमारी की। तलाशी के दौरान कंप्यूटर समेत अन्य सामान जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि जब्त किए गए सामान से क्या अतिरिक्त जानकारी सामने आती है और क्या इससे कथित रिश्वत नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलती है।
नगर आयुक्त ने तत्काल किया निलंबित
एसीबी की कार्रवाई के बाद अहमदाबाद महानगरपालिका के नगर आयुक्त ने भी तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की। भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद अमित डोंगरे को उनके पद से निलंबित कर दिया गया।
मामले में कथित बिचौलियों की भूमिका भी सामने आने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई और उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया।
विशेष एसीबी अदालत ने जमानत याचिका खारिज की
गिरफ्तारी के बाद अमित डोंगरे और भावसिंह झाला की ओर से नियमित जमानत के लिए विशेष एसीबी अदालत में आवेदन किया गया था। अदालत ने मामले की गंभीरता, भ्रष्टाचार के आरोपों और जांच में सामने आए प्राथमिक साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत के इस फैसले से दोनों आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं और वे फिलहाल जेल में ही रहेंगे।
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में अब सिर्फ 36 हजार रुपये की कथित रिश्वत तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाना जरूरी है कि फायर एनओसी से जुड़े मामलों में कथित तौर पर किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा था।
क्या अमित डोंगरे अकेले ही यह पूरा खेल चला रहा था या फिर उसके पीछे किसी बड़े अधिकारी अथवा प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण था? जांच एजेंसियां इस दिशा में कितनी गहराई तक जाती हैं और क्या इस मामले में अन्य बड़े नाम सामने आते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

