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साबरमती सेंट्रल जेल में छलका स्नेह का सागर: रक्षाबंधन पर जेल की सलाखों के पीछे दिखे भावुक दृश्य, भाई की कलाई पर राखी बांधते ही बहनों की आंखें छलक उठीं

अहमदाबाद : रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर अहमदाबाद की ऐतिहासिक साबरमती सेंट्रल जेल में आज भाई-बहन के प्रेम और भावनाओं की बेहद मार्मिक तस्वीर देखने को मिली। विभिन्न मामलों में जेल की सलाखों के पीछे दिन गुजार रहे बंदी भाइयों से मिलने के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों से उनकी सगी बहनें साबरमती जेल पहुंचीं। कड़ी सुरक्षा के बीच जब बहनों ने अपने भाइयों से मुलाकात की और उनकी कलाई पर राखी बांधी तो जेल परिसर कुछ देर के लिए प्रेम, ममता और भावनाओं से भर उठा।

भाई की कलाई पर राखी बांधते ही छलक पड़े आंसू

रक्षाबंधन के अवसर पर जेल प्रशासन की ओर से बंदी भाइयों और उनकी बहनों की मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। लंबे समय बाद जब बहनों को अपने भाइयों से आमने-सामने मिलने का मौका मिला तो कई भावुक दृश्य सामने आए।

बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम और रक्षा का प्रतीक राखी बांधी और उनका मुंह मीठा कराया। राखी बांधते समय कई बहनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। दूसरी ओर भाइयों ने भी अपनी बहनों को भावुक होकर गले लगाया और जल्द ही सजा पूरी होने के बाद खुद को सुधारकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प जताया।

कड़ी सुरक्षा के बीच भी दिखा परिवार का प्यार

आमतौर पर सख्त अनुशासन और सुरक्षा के लिए पहचानी जाने वाली साबरमती सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन के दिन माहौल कुछ अलग ही नजर आया। जेल की सलाखों के पीछे बंद भाइयों के लिए बहनों की यह मुलाकात भावनाओं और उम्मीद की किरण बन गई।

बहनों ने अपने भाइयों की सलामती, अच्छे भविष्य और जल्द उनके जीवन में सुधार के लिए प्रार्थना की। कई परिवारों के लिए यह मुलाकात लंबे समय बाद अपने प्रियजन को करीब से देखने और उससे भावनाएं साझा करने का मौका बनी।

जेल प्रशासन ने की विशेष व्यवस्था

जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में रक्षाबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। बहनों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए बैठने की व्यवस्था के साथ राखी, कंकू और प्रसाद आदि की भी व्यवस्था की गई थी।

सुरक्षा के सभी नियमों का पालन करते हुए बंदियों को अपनी बहनों से मिलने और राखी बंधवाने की अनुमति दी गई। कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए जेल प्रशासन और पुलिस का पर्याप्त स्टाफ भी मौजूद रहा।

सलाखों के पीछे भी जिंदा रहा भाई-बहन का रिश्ता

रक्षाबंधन के इस भावुक अवसर ने यह संदेश दिया कि किसी व्यक्ति के जेल में होने के बावजूद उसके परिवार का प्यार और अपनेपन का रिश्ता खत्म नहीं होता। जेल की ऊंची दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच भी भाई-बहन का स्नेह उसी तरह कायम रहा।

रक्षाबंधन के दिन साबरमती सेंट्रल जेल में सख्त अनुशासन के बीच भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। जेल प्रशासन के इस मानवीय प्रयास की बंदियों और उनके परिवारजनों ने सराहना की।

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