एक शख्स को इनकम टैक्स रिटर्न में बैंक में जमा रकम पर ब्याज की जानकारी न देना भारी पड़ गया। इनकम टैक्स ने उस शख्स पर ₹3.08 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। मामला आईटीएटी पहुंचा जहां ट्रिब्यूनल ने इनकम टैक्स विभाग की गलती मानी और जुर्माना रद्द कर दिया।
नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय अगर आपने बैंक अकाउंट में जमा रकम पर मिली ब्याज की जानकारी नहीं दी है तो परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा ही मामला एक शख्स के साथ हुआ है। इस शख्स को इनकम टैक्स विभाग की ओर से 3 लाख रुपये से ज्यादा का नोटिस मिला। हालांकि मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) की दिल्ली बेंच में पहुंचा, जहां इस शख्स को राहत मिली।
यह मामला सिद्धार्थ गुप्ता बनाम इनकम टैक्स ऑफिसर (ITO) का है। सिद्धार्थ गुप्ता नौकरीपेशा हैं। उन्होंने असेसमेंट ईयर 2020-21 के लिए 16 अक्टूबर 2020 को अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया था। इसमें उन्होंने अपनी कुल आय 81.35 लाख रुपये बताई थी। बाद में इनकम टैक्स विभाग को अपने इनसाइट पोर्टल पर उनके बैंक ब्याज और कार खरीदने से जुड़ी जानकारी मिली। इसके आधार पर विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 147 के तहत उनका पुराना मामला दोबारा खोल दिया।
इनकम टैक्स ने थमाया नोटिस
इनकम टैक्स विभाग ने बाद में 31 मार्च 2024 को धारा 148 के तहत नोटिस जारी किया। इस नोटिस के जवाब में सिद्धार्थ गुप्ता ने 24 अप्रैल 2024 को नया रिटर्न दाखिल किया। इसमें उन्होंने अपनी कुल आय बढ़ाकर 85.84 लाख रुपये दिखाई। यानी उन्होंने पहले रिटर्न में छूट गए 4.49 लाख रुपये के बैंक ब्याज को भी शामिल कर लिया।
असेसिंग ऑफिसर ने उनकी बताई गई आय को स्वीकार कर लिया और कोई अतिरिक्त आय नहीं जोड़ी। हालांकि, इसके बाद विभाग ने बैंक ब्याज की जानकारी पहले रिटर्न में नहीं देने के लिए धारा 270A के तहत 3.08 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। यह जुर्माना टैक्स की रकम का 200 फीसदी था।
आईटीएटी ने क्यों पलटा फैसला?
सिद्धार्थ गुप्ता ने इस जुर्माने के खिलाफ पहले कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील) में शिकायत की, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने आईटीएटी का रुख किया। सभी सबूतों को देखते हुए आईटीएटी ने जुर्माने की पूरी रकम रद्द कर दी। आईटीएटी ने जुर्माना रद्द करने के पीछे दो प्रमुख वजहें बताईं।
- विभाग ने नोटिस में गलती स्पष्ट नहीं की
ट्रिब्यूनल ने कहा कि इनकम टैक्स विभाग के नोटिस में यह साफ नहीं बताया गया था कि टैक्सपेयर ने धारा 270A(9) के किस प्रावधान का उल्लंघन किया है।
ट्रिब्यूनल ने इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के श्नाइडर इलेक्ट्रिक (Schneider Electric) से जुड़े फैसले का भी हवाला दिया।
- बैंक ब्याज छूटना अनजाने में हुई गलती थी
टैक्सपेयर ने दलील दी कि उनका मूल आईटीआर कोरोना महामारी के दौरान दाखिल हुआ था।
ट्रिब्यूनल ने देखा कि टैक्सपेयर ने विभाग का नोटिस मिलने के बाद ब्याज की पूरी जानकारी नए रिटर्न में दे दी थी और उस पर लागू टैक्स भी चुका दिया था।
आईटीएटी के मुताबिक इन परिस्थितियों से पता चलता है कि बैंक ब्याज की जानकारी छूटना जानबूझकर की गई गलती नहीं थी। इसलिए धारा 270A(6)(a) के तहत उन्हें राहत मिल सकती है।
क्या है 200% तक जुर्माने का नियम?
इनकम टैक्स रिटर्न में कम आय दिखाने या जानबूझकर गलत जानकारी देने पर आयकर विभाग जुर्माना लगा सकता है। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A के तहत इस तरह की गलती पर टैक्स की रकम का 50% से लेकर 200% तक जुर्माना लग सकता है। यह नियम असेसमेंट ईयर 2017-18 से लागू है।
क्या है इनकम टैक्स की धारा 270A?
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 270A के तहत आय कम बताने और गलत जानकारी देकर आय छिपाने के मामलों में जुर्माने का प्रावधान है। इसे फाइनेंस एक्ट, 2016 के जरिए लागू किया गया था।
इस धारा का मकसद टैक्स से जुड़ी गलतियों और जानबूझकर की गई गड़बड़ी के लिए जुर्माने के नियमों को स्पष्ट करना है। इससे पहले ऐसे मामलों में धारा 271(1)(c) के तहत जुर्माना लगाया जाता था।
कब लगेगा 50% जुर्माना
अगर किसी व्यक्ति ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में जितनी आय दिखाई है, जांच के बाद आयकर विभाग को उससे ज्यादा आय मिलती है, तो इसे आय कम बताना माना जा सकता है।
ऐसे मामले में कम बताई गई आय पर बनने वाले टैक्स का 50% जुर्माना लग सकता है।
उदाहरण के लिए अगर कम बताई गई आय पर टैक्स की देनदारी 1 लाख रुपये बनती है, तो जुर्माना 50 हजार रुपये हो सकता है।
कब लगेगा 200% जुर्माना?
अगर कोई टैक्सपेयर जानबूझकर गलत जानकारी देकर आय छिपाता है या रेकॉर्ड में हेरफेर करता है, तो इसे मिसरिपोर्टिंग माना जा सकता है।
ऐसे मामलों में टैक्स की रकम का 200% जुर्माना लगाया जा सकता है।
उदाहरण के लिए अगर गलत जानकारी देकर छिपाई गई आय पर 1 लाख रुपये का टैक्स बनता है, तो 2 लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है।
किन मामलों में नहीं लगेगा जुर्माना?
धारा 270A(6) के तहत कुछ स्थितियों में जुर्माने से राहत मिल सकती है। अगर टैक्सपेयर अपनी गलती की सही और भरोसेमंद वजह बताता है और आय से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां सही तरीके से सामने रखता है, तो जुर्माना नहीं लगाया जा सकता

