Homeमनोरजनसेंसर बोर्ड ने बदले 5 बड़े नियम, 'सतलुज' के डायरेक्‍टर की नई...

सेंसर बोर्ड ने बदले 5 बड़े नियम, ‘सतलुज’ के डायरेक्‍टर की नई शर्तों पर CBFC को फटकार- कायर, तानाशाह कहीं के

सेंसर बोर्ड ने फिल्‍म सर्टिफिकेशन को लेकर 5 बड़े बदलाव क‍िए हैं। CBFC की नई गाइडलाइन ने जहां फ‍िल्‍मों के टाइटल और र‍िलीज डेट को लेकर मेकर्स की च‍िंंता बढ़ा दी है, वहीं ‘सतलुज’फ‍िल्‍म के डायरेक्‍टर हनी त्रेहान ने इस पर बोर्ड को फटकार लगाई है। उन्‍होंने इस कदम को ‘कायरता और तानाशाही’ बताया है।

केंद्रीय फिल्‍म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने अपने 18 सदस्यीय नए बोर्ड के गठन के दो महीने बाद न‍ियमों में बड़ा बदलाव किया है। सेंसर बोर्ड ने फिल्मों के सर्टिफिकेशन को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की है, जिसमें 5 मुख्य शर्तें जोड़ी गई हैं। इनमें सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब किसी भी फिल्‍म की पहले से घोषित रिलीज डेट का मतलब यह नहीं होगा कि बोर्ड उसके सर्टिफिकेशन प्रोसेस में तेजी लाए। इसके साथ ही अधूरी फिल्मों को जांच के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह एडवाइजरी उन मेकर्स के लिए है जो सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 और सिनेमैटोग्राफ रूल्स, 2024 के तहत सर्टिफिकेशन चाहते हैं। दिलचस्‍प बात यह है कि इस नई गाइडलाइंस के आते ही डायरेक्‍टर हनी त्रेहान ने बोर्ड को फटकार लगाई है। OTT पर रिलीज हनी त्रेहान की ‘सतलुज’ फिल्‍म को चार महीने पहले हटा दिया गया था। दिलजीत दोसांझ स्‍टारर फिल्‍म के डायरेक्‍टर ने दो टूक शब्‍दों में सेंसर बोर्ड को ‘कायर और तानाशाह’ कहा है।

सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, जांच और सर्टिफिकेशन के लिए सबमिट की जाने वाली फिल्में हर तरह से पूरी और फाइनल रूप में होनी चाहिए। इसमें फाइनल ग्राफिक्स, बैकग्राउंड स्कोर, साउंड मिक्स और थिएटर में दिखाने के लिए जरूरी सभी एक्सेसिबिलिटी फीचर्स शामिल होने चाहिए। बोर्ड ने फिल्म निर्माताओं को यह भी चेतावनी दी है कि वे पहले से घोषित टाइटल्स को फाइनल या स्वीकृत न मान लें, सिर्फ इसलिए कि उन्हें सर्टिफिकेशन के लिए सबमिट किया गया है। आवेदकों को इस बात के लिए तैयार रहना होगा कि फिल्म का टाइटल बदलना पड़ सकता है।

‘बैटल ऑफ गलवान’ और ‘घूसखोर पंडत’ का बदला टाइटल

सेंसर बोर्ड की यह गाइडलाइन ऐसे समय में आई है, जब पिछले एक साल में कई फिल्मों के टाइटल बदले गए हैं। इनमें ‘जानकी बनाम स्टेट ऑफ केरल’, सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ का टाइटल ‘मातृभूमि’ किया गया और मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडत’ का नाम ‘गजब रात’ करना पड़ा। एडवाइजरी में आगे कहा गया है कि अगर फिल्म प्रिंट अधूरे हैं, तो ऐसे आवेदनों को नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा। इससे आवेदन में देरी हो सकती है, उन्हें वापस किया जा सकता है या फिर खारिज भी किया जा सकता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments