सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट विंडफॉल गेन्स टैक्स जीरो कर दिया है। डीजल पर इसे बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमत में अक्टूबर में 14 फीसदी तेजी आई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आ सकती है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका 3 नवंबर को होने वाले मिड टर्म पोल के बाद ईरान पर नए सिरे से हमले करने की योजना बना रहा है। इस बीच सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट विंडफॉल गेन्स टैक्स जीरो कर दिया है। डीजल पर इसे बढ़ाकर 11.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। ये रेट अगले 15 दिनों के लिए लागू रहेंगे।
एक सरकारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है। इसे मुताबिक घरेलू खपत के लिए उपलब्ध पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर पहले 2.5 रुपये टैक्स लग रहा था लेकिन अब इसे जीरो कर दिया गया है। वहीं डीजल के मामले में इसे 8.5 रुपये से बढ़ाकर 11.5 रुपये कर दिया गया है। एटीएफ के मामले में इसे 10.5 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
कच्चे तेल की कीमत
सरकार हर 15 दिन में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करती है। यह पिछले 15 दिनों में कच्चे तेल की औसत कीमतों पर निर्भर करता है। हाल में कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 113.4 डॉलर प्रति लीटर के भाव पर बंद हुआ था जबकि दो दिन पहले इंडियन बास्केट की कीमत 114.6 डॉलर प्रति बैरल थी। गोल्डमैन सैश के मुताबिक अगर पश्चिम एशिया में स्थितियां खराब होती हैं तो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। दूसरी तरफ अगर स्थिति सामान्य होती है तो यह 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।
क्या एक्सपोर्ट करता है भारत?
भारत मुख्य रूप से डीजल, पेट्रोल, जेट फ्यूल, नेफ्था और फ्यूल ऑयल का निर्यात करता है। कुल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में डीजल की हिस्सेदारी 42% और पेट्रोल की 23% है। भारत से एक्सपोर्ट होने वाले पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी करीब 70% है। रूसी निवेश वाली कंपनी नायरा एनर्जी, सरकारी कंपनी मेंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) और अन्य रिफाइनरियां भी एक्सपोर्ट करती हैं।

