PSI चावड़ा, ASI शक्तिसिंह और एक कांस्टेबल ने कामरेज पुलिस स्टेशन में एक वकील और उसके भाई को टॉर्चर किया: उन्होंने उस पर केस वापस लेने का दबाव बनाया, उसे ऊपर के कमरे में ले गए और पट्टियों से पीटा!
“अगर कानून के रखवाले ही वकीलों को पीट रहे हैं, तो आम लोगों की क्या हालत होगी?” होम मिनिस्टर हर्ष सांघवी के गढ़ में पुलिस डिपार्टमेंट की बेरहम बदमाशी के खिलाफ वकीलों में बहुत गुस्सा है!
सूरत : गुजरात में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार खाकी वर्दी पहने कुछ बेकाबू पुलिसवाले अब खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। सूरत जिले के कामरेज पुलिस स्टेशन इलाके से एक बेहद शर्मनाक, चौंकाने वाली और शर्मनाक घटना सामने आई है।
जिस पुलिस स्टेशन में आम लोग इंसाफ मांगने जाते हैं, उसी थाने में अब एक वकील और उसके भाई को ऊपर के कमरे में खाकी वर्दी वालों ने बेरहमी से पीटा है! इस अमानवीय अत्याचार से पूरे कानूनी समुदाय और सूरत में भारी हलचल मच गई है।
पूरी घटना क्या थी? केस वापस लेने का दबाव और बेरहमी से पिटाई
मिली जानकारी के मुताबिक, एक वकील कामरेज इलाके में एक झगड़े और केस में शामिल पार्टियों को न्याय दिलाने के लिए एक्टिव हो गया था। लेकिन भ्रष्ट सिस्टम और पुलिस की मिलीभगत देखिए, कानून सिखाने वाले वकील पर केस वापस लेने और समझौता करने का बहुत ज़्यादा दबाव डाला गया।
जब वकील ने इन गैर-कानूनी और ज़बरदस्ती वाली शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, तो कामरेज पुलिस स्टेशन के ज़िम्मेदार अधिकारियों का ईगो हर्ट हो गया। आरोप है कि वकील और उसके भाई को PSI चावड़ा, ASI शक्तिसिंह और एक कांस्टेबल ने टारगेट किया। उसे पुलिस स्टेशन के जनरल रूम से घसीटकर ऊपर के कमरे में ले जाया गया और वहाँ दरवाज़े बंद करके पुलिस बेल्ट से बेरहमी से पीटा गया!
हाथ में गंभीर चोट: मजबूरन हॉस्पिटल ले जाया गया
पुलिस की इस बेरहमी से की गई पिटाई में वकील के हाथ में गंभीर चोटें आईं। खून से लथपथ और डरी हुई हालत में वकील को इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। अगर एक वकील, जो जस्टिस सिस्टम का एक अहम पिलर है, उसे पुलिस स्टेशन के अंदर इस तरह की क्रिमिनल और जानलेवा पिटाई का सामना करना पड़ता है, तो आम और बेकसूर लोगों का क्या होगा, यह सोचना भी डरावना है!
लोगों के सवाल: क्या इससे होम मिनिस्टर हर्ष सांघवी को बुरा नहीं लगता?
जैसे ही यह घटना सामने आई, सूरत के वकीलों में भारी गुस्सा फैल गया है और यह पूरे गुजरात में चर्चा का विषय बन गया है। जनता सीधे सवाल पूछ रही है:
क्या गुजरात के होम मिनिस्टर श्री हर्ष सांघवी के होम डिपार्टमेंट में पुलिस अब कानून से परे जाकर क्रिमिनल्स जैसा बर्ताव करेगी?
जब आम जनता उस पुलिस स्टेशन के दरवाज़े खटखटाएगी जहाँ वकील सुरक्षित नहीं हैं, तो उनका क्या होगा?
खाकी वर्दी की आड़ में बेकसूर लोगों पर ज़ुल्म करने वाले PSI चावड़ा, ASI शक्तिसिंह और कांस्टेबलों के खिलाफ कोई सस्पेंशन या सख्त एक्शन क्यों नहीं लिया गया? इंसाफ़ न मिलने पर हिंसक आंदोलन की धमकी
इस हरकत की बार एसोसिएशन और लोकल नेताओं ने कड़ी निंदा की है। अगर इन ज़ालिम पुलिसवालों की खाकी वर्दी तुरंत छीनकर उनके खिलाफ़ कानूनी क्रिमिनल केस दर्ज नहीं किए गए, तो हिंसक आंदोलन की धमकी दी गई है।
अब देखना यह है कि पुलिस के बड़े अधिकारी और हुक्मरान कब इस खाकी आतंक पर आंखें मूंद लेंगे, या रक्षकों के ही भक्षक बनने का यह सिलसिला जारी रहेगा?

