“अब क्या खाएं और क्या नहीं, क्या राजभवन तय करेगा?”: कांग्रेस और विपक्ष की जोरदार दहाड़; केरल में 99% लोग नॉन-वेजिटेरियन होने के बावजूद इस फैसले के खिलाफ भारी गुस्सा!
गवर्नर के आदेश से केरल की पॉलिटिक्स में भूचाल: सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, खाने-पीने की आज़ादी को कुचलने के आरोप
तिरुवनंतपुरम/अहमदाबाद : दक्षिणी राज्य केरल से एक पॉलिटिकल और सोशल विवाद सामने आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। केरल के गवर्नर का पद संभालते ही एक ऐसा आदेश दिया गया है, जिससे राज्य में काफी गरमागरमी मची हुई है। गवर्नर ने राजभवन के अंदर नॉन-वेजिटेरियन खाने पर बैन लगाने का आदेश जारी किया है, जिससे अब कांग्रेस समेत विपक्ष भी सामने आ गया है और सरकार और गवर्नर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
क्या है पूरा विवाद? कांग्रेस के तीखे हमले
केरल के तटीय इलाकों और लोकल कल्चर में नॉन-वेजिटेरियन खाना खाने वाले लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है। ऐसे में राजभवन द्वारा नॉन-वेजिटेरियन खाने पर बैन लगाने से पॉलिटिकल पार्टियां नाराज़ हैं।
कांग्रेस पार्टी और विपक्षी नेताओं ने हमला किया है और सवाल किया है:
“अब क्या केरल के लोग तय करेंगे कि वे क्या खाएंगे और क्या नहीं, यह राजभवन करेगा या कोई नेता? यह व्यक्तिगत आज़ादी और खाने के अधिकार पर सीधा हमला है!”
विपक्ष का कहना है कि किसी भी राज्य की कल्चरल और खाने की विरासत को नज़रअंदाज़ करके ऐसे मनमाने फ़ैसले थोपना डेमोक्रेसी की भावना के ख़िलाफ़ है।
केरल में 99% लोग नॉन-वेजिटेरियन हैं: लोगों में भारी गुस्सा
सोशल स्टैटिस्टिक्स और रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल राज्य में लगभग 99% लोग नॉन-वेजिटेरियन खाना खाते हैं। वहां के खाने के कल्चर और ट्रेडिशन में मछली और मीट मुख्य डाइट का हिस्सा हैं।
ऐसे में, सरकारी बिल्डिंग्स में नॉन-वेजिटेरियन खाने पर बैन लगाने के फ़ैसले से लोकल नागरिकों और युवाओं में भी काफ़ी गुस्सा है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछ रहे हैं कि पद संभालते ही जनता की पसंद पर रोक लगाने का यह कैसा समझ से बाहर का आदेश है?
यह मामला नेशनल लेवल पर चर्चा का विषय बन गया है।
यह घटना सिर्फ केरल तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि अब इसने नेशनल पॉलिटिक्स में भी बहस छेड़ दी है। पूरी संभावना है कि कल्चरल फ्रीडम के खिलाफ कथित दखल के इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में पॉलिटिकल घमासान और तेज होगा।
अब देखना यह है कि बढ़ते विरोध और विवाद के बीच राजभवन इस मामले पर सफाई देता है या अपना फैसला बदलता है!

