बरेली में नकली यौनवर्धक दवाओं को धंधा करने वाले गैंग का खुलासा हुआ है। गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है। तीसरा फरार है।
यूपी के बरेली में पुलिस ने नकली यौनवर्धक दवाओं का ऑनलाइन कारोबार करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। राजीव एन्क्लेव स्थित एक मकान में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें मुख्य आरोपी 8वीं पास है, जो खुद को डॉक्टर और हकीम बताकर ग्राहकों से फोन पर बात करता था। पुलिस के पहुंचते ही गिरोह का तीसरा सदस्य पीछे के दरवाजे से भाग निकला।
छापे के दौरान पुलिस को मकान के अंदर कॉल सेंटर जैसा सेटअप मिला। मौके से 6 कंप्यूटर, 8 मॉनिटर, एक लैपटॉप, 3 प्रिंटर, स्कैनर और 12 मोबाइल फोन बरामद किए गए। इसके अलावा नकली दवाओं के 85 पैकेट, पैकिंग का सामान, फर्जी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, 6 चेकबुक, 14 एटीएम कार्ड और 1.99 लाख रुपये नकद मिले हैं।
घर में बना रखा था पूरा कॉल सेंटर
पुलिस के मुताबिक, राजीव एन्क्लेव के मकान से ऑनलाइन दवाओं की बिक्री किए जाने की सूचना मिली थी। टीम ने छापा मारा तो अंदर बाकायदा कॉल सेंटर संचालित होता मिला। एक आरोपी कंप्यूटर पर ग्राहकों का डेटा संभाल रहा था, जबकि दूसरे के पास खाली कैप्सूल में पाउडर भरकर उन्हें पैक करने का काम था। पुलिस ने देवरनियां निवासी समीरउद्दीन (24) और बड़ी बिहार निवासी यूसुफ (25) को गिरफ्तार किया है। यूसुफ का भाई इलियास खान पुलिस टीम को देखकर पिछले दरवाजे से फरार हो गया। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
इंस्टाग्राम से ग्राहक, फोन पर डॉक्टर बनकर सौदा
जांच में सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचता था। आरोपियों ने इंस्टाग्राम पर हर्बल एंड जड़ीबूटी नाम से पेज बनाया था। इस पर दवाओं का प्रचार किया जाता था। ग्राहक संपर्क करते तो 8वीं पास समीरउद्दीन खुद को डॉक्टर बताकर उनसे बातचीत करता और मर्दाना कमजोरी दूर करने का दावा करते हुए दवा लेने के लिए राजी करता था। ऑर्डर मिलने के बाद दवाओं को पार्सल के जरिए भेजा जाता था। इसके बदले ग्राहकों से यूपीआई के माध्यम से करीब 250/300 रुपये या उससे अधिक रकम ली जाती थी।
सस्ता पाउडर खरीदकर तैयार करते थे दवाएं
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य सहारनपुर और मुरादाबाद के बाजारों से सस्ता पाउडर और अन्य कच्चा माल खरीदते थे। इसके बाद उसे कैप्सूल में भरकर पैक किया जाता था। देवरनियां कस्बे में भी आरोपियों की एक दुकान होने की जानकारी मिली है। पुलिस को आशंका है कि इसी नेटवर्क के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में पार्सल भेजे जाते थे।
फर्जी लाइसेंस से असली कारोबार का दिखावा
कार्रवाई से बचने के लिए आरोपियों ने दवाओं के निर्माण से संबंधित फर्जी लाइसेंस भी तैयार करा रखा था। पुलिस की शुरुआती जांच में गिरोह के बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब खातों की जांच कर रही है।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि आरोपी सोशल मीडिया और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, सप्लायर्स और नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर फरार इलियास खान की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

