कलेक्टर के खिलाफ किसानों का गुस्सा: लोगों के अन्नदाता सड़कों पर उतर आए हैं, फिर भी एडमिनिस्ट्रेशन की आंखें क्यों नहीं खुल रही हैं?
पालनपुर/बनासकांठा : आज गुजरात में अन्नदाता माने जाने वाले किसानों की हालत दयनीय हो गई है और सरकारी ढिंढोरा पीटने के बीच आलम यह है कि किसान अपने हक और इंसाफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। किसानों का यह बेहद उग्र मूड बनासकांठा जिले के हेडक्वार्टर पालनपुर से सामने आया है, जहां लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और खासकर कलेक्टर के खिलाफ किसानों का गुस्सा ट्रैफिक जाम और सड़कों पर उग्र प्रदर्शन के रूप में फूट पड़ा।
कलेक्टर के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूटा: अन्नदाताओं की बात सुनने को कोई तैयार क्यों नहीं है?
हजारों की संख्या में किसान पालनपुर में जमा हुए और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के खिलाफ नारेबाजी कर माहौल गरमा दिया। किसानों के मुताबिक, प्रशासन उनकी लंबे समय से पेंडिंग मांगों, सिंचाई के पानी के मुद्दे, फसल बीमा के मुद्दे और ज़्यादा या बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के मुआवजे के बारे में सिर्फ़ खोखले आश्वासन देता है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
जब अन्नदाता अपने हक की लड़ाई के लिए कलेक्टर ऑफिस या प्रशासनिक सिस्टम का दरवाज़ा खटखटाते हैं, तो अधिकारियों की बेपरवाही और तानाशाही
रवैये के कारण किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच जाता है।
भारी ट्रैफिक जाम, पुलिस और प्रशासन सकते में
किसानों के इस भयंकर गुस्से के कारण पालनपुर की मुख्य सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। किसानों ने सड़क के बीच में बैठकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया, जिससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। इस घटना ने साबित कर दिया है कि जनता के टैक्स से सैलरी पाने वाले अधिकारी अगर किसानों की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम रहते हैं, तो किसानों के पास सड़कों पर उतरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। पक्को गुजरात न्यूज़ पेपर के ज़रिए साफ़ चेतावनी दी जाती है कि अगर बनासकांठा के किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द पक्का हल नहीं किया गया, तो इस आग को पूरे गुजरात में फैलने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा। सरकार और प्रशासन को समय रहते जागना होगा, नहीं तो आने वाले दिनों में किसानों का आंदोलन गंभीर रूप ले लेगा!

