26 सितंबर के प्रेस नोट में सुप्रीम कोर्ट पर गोएबल्स की पॉलिसी अपनाने का आरोप लगाया गया: सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि “हमने फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं होने दिया है!”
नई दिल्ली/अहमदाबाद : देश की डेमोक्रेसी की नींव माने जाने वाले चुनावी प्रोसेस पर सबसे बड़ा और काला धब्बा लग गया है। इलेक्शन कमीशन में सबसे ऊंचे पद पर बैठे चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश भर से भारी गुस्सा देखने को मिला है। ज्ञानेश कुमार खुलेआम देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं और उन पर सत्ता के बल पर डेमोक्रेसी का गला घोंटने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। देश की सुप्रीम कोर्ट में हुए खुलासों ने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है और अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार के इशारे पर देश में ‘वोट चोरी’ की कोई बड़ी साजिश चल रही है? 26 सितंबर के प्रेस नोट का बड़ा झूठ और सुप्रीम कोर्ट का सटीक तमाचा!
जानकारी के मुताबिक, 26 सितंबर को चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने एक ऑफिशियल प्रेस नोट जारी किया था। इस प्रेस नोट में खुलेआम दावा किया गया था कि वोटर लिस्ट में इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म-6’ में जो भी बदलाव किए गए हैं, वे सीधे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और आदेशों के अनुसार किए गए हैं।
लेकिन, यह सफेद झूठ ज्यादा देर तक नहीं टिक सका! जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने इस दावे की पोल खोल दी। सुप्रीम कोर्ट ने बहुत सख्त शब्दों में साफ किया है कि—“हमने कभी भी किसी बदले हुए फॉर्म-6 को कोई मंजूरी नहीं दी है!” सुप्रीम कोर्ट के इस बयान से यह साबित हो गया है कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने देश की सबसे बड़ी अदालत के नाम का गलत इस्तेमाल करके जनता और संविधान के साथ खुलेआम धोखा किया है।
वोट चोरी का खेल और पकड़े जाने पर पूरे देश में हंगामा
इन दिनों पूरा देश सवाल पूछ रहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी कोई इजाजत नहीं दी है, तो इलेक्शन कमीशन ने झूठे दावे करते हुए प्रेस नोट क्यों जारी किया? क्या इसके पीछे करोड़ों वोटर्स के हक छीनने और वोट चुराने की कोई सोची-समझी साज़िश है? जब यह फ्रॉड पकड़ा गया, तो अब इसे सामने लाने के बजाय सिस्टम देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। अगर संवैधानिक पद पर बैठकर खुलेआम ऐसे गुमराह करने वाले बयान दिए जा रहे हैं, तो आम लोगों के वोटिंग राइट्स की रक्षा कौन करेगा?
जनता का गुस्सा: “ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार करो और जेल में डालो!”
इस गंभीर स्कैम के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भूकंप जैसा माहौल बन गया है। लोगों के हकों को रौंदने और न्यायपालिका के सामने झूठे दावे करने वालों को सलाखों के पीछे डालने की ज़ोरदार मांग हो रही है। पूरे देश से आवाज़ें उठ रही हैं कि ऐसे ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त क्रिमिनल एक्शन लिया जाना चाहिए जिन्होंने डेमोक्रेसी की पवित्रता के साथ छेड़छाड़ की है। ‘पाको गुजरात न्यूज़ पेपर’ के ज़रिए यह मांग की जा रही है कि इन जनविरोधी और गैर-संवैधानिक कामों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें तुरंत सलाखों के पीछे डाला जाए, ताकि देश का डेमोक्रेसी बच सके!

