महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना के प्रवक्ता आनंद दुबे को लेकर खबर आई की उन्हे पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। वही आनंद दुबे ने दावा किया कि यह खबर फर्जी है। वह अब भी पार्टी में हैं और पार्टी के प्रवक्ता हैं।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने तेजतर्रार प्रवक्ता और नेता आनंद दुबे को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने इस संबंध में आधिकारिक मीडिया वक्तव्य जारी किया है। शिवसेना यूबीटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मीडिया के सभी प्रतिनिधियों को सूचित किया जाता है कि पंडित अवधेश शुक्ला द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी एवं प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर, अनिल देसाई ने आनंद दुबे को पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय की सूचना संबंधित संगठनात्मक पदाधिकारियों को दे दी गई है। हालांकि आनंद दुबे ने इस खबर को फर्जी बताया।
यह आदेश पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल देसाई के निर्देश पर जारी किया गया है। हालांकि पार्टी ने निष्कासन की वजह को लेकर विस्तार से कुछ नहीं बताया है लेकिन माना जा रहा है कि अंदरूनी शिकायत और अनुशासनहीनता के चलते यह कदम उठाया गया है।
शिवसेना यूबीटी के चर्चित चेहरों में थे एक
आनंद दुबे शिवसेना यूबीटी के सबसे चर्चित चेहरों में से एक रहे हैं। वह लगातार टीवी डिबेट में पार्टी का पक्ष रखते थे और उद्धव ठाकरे के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। अचानक हुए इस निष्कासन से राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जिस पार्टी का मैं प्रवक्ता हूं, उसे यह भी नहीं पता कि मुझे कौन निकाल रहा है। जिस व्यक्ति, यानी आनंद दुबे को निकाला जा रहा है, उसे खुद नहीं पता कि उसे निकाला जा रहा है। फिर भी कुछ लोग ऐसी खबरें चला रहे हैं कि आनंद दुबे को पार्टी से हटा दिया गया है, निकाल दिया गया है, बर्खास्त कर दिया गया है या उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। आनंद दुबे
पं. अवधेश शुक्ला ने दी थी रिपोर्ट
ऐसा माना जा रहा है कि हाल के दिनों में आनंद दुबे के कुछ बयानों और गतिविधियों को लेकर पार्टी हाईकमान नाराज था। पंडित अवधेश शुक्ला की दी गई रिपोर्ट के बाद यह फैसला लिया गया। वहीं, आनंद दुबे की ओर से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन वह जल्द ही अपना पक्ष रख सकते हैं।
निष्कासन पर आनंद दुबे का आया बयान
वहीं आनंद दुबे ने निष्कासन की खबर को पूरी तरह फर्जी और गलत बताया है। इसके साथ ही साजिश के तहत पार्टी को बदनाम करने का आरोप लगाया है। आनंद दुबे ने कहा कि पार्टी कह रही है कि हमने नहीं निकाला। मुझे पार्टी से निकालने की कोई जानकारी नहीं है। मुझे पार्टी से निष्कासित किए जाने की खबर बेबुनियाद है। मुझे और मेरी पार्टी को बदनाम करने के लिए ऐसी साजिश रची जा रही है। वरिष्ठ नेताओं ने भी पार्टी से निकाले जाने की खबरों को अफवाह बताया है।
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता ने कहा कि कोई भी एसआईआर का विरोध नहीं कर रहा है। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) जरूरी है। इसे समय-समय पर किया जाना चाहिए। लेकिन एसआईआर का इस्तेमाल राजनीतिक पार्टियों को तोड़ने, कमजोर करने या कमजोर दिखाने, भ्रष्टाचार करने, उनके नाम हटाने और अपने नाम जोड़ने के बहाने के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली में भी यही हो रहा है।

