अहमदाबाद। सरकारी पद का दुरुपयोग करके जनता के पसीने की कमाई को कैसे उड़ाया जा सकता है, इसका जीता-जागता और चौंकाने वाला उदाहरण गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता के मामले से सामने आया है। जिनके सिर पर विश्वविद्यालय की शैक्षिक गरिमा, पारदर्शिता और नैतिकता बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी थी, उन्हीं पूर्व कुलपति के अत्यधिक ऐशो-आराम और सरकारी धन के भ्रष्ट उपयोग के पुख्ता सबूत ‘महानगर मेट्रो’ के पास आए हैं।
सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा और नामी दुकानों में खरीदारी
मिली जानकारी और सबूतों के अनुसार, नीरजा गुप्ता ने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान दुबई और अमेरिका जैसे देशों की महंगी और नामी दुकानों से खुलेआम निजी खरीदारी की थी। इस विदेश यात्रा के दौरान उन्होंने अपने निजी उपयोग के लिए होठों को रंगने वाली सामग्री, आंखों का काजल, महंगे कपड़े और अन्य सौंदर्य प्रसाधनों की खरीदारी की थी। आश्चर्य की बात तो यह है कि यह हजारों रुपये का खर्च उन्होंने अपनी जेब से नहीं, बल्कि गुजरात विश्वविद्यालय के सरकारी कोष से वसूला था!
सरकारी अनुदान में धांधली और बेटे के खाते में पैसे भेजने का आरोप
नीरजा गुप्ता पर केवल सौंदर्य प्रसाधनों की खरीदारी के ही नहीं, बल्कि कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों के आरोप लगे हैं:
भर्ती घोटाला: विश्वविद्यालय में नियमों को ताक पर रखकर की गई अनिश्चित और संदिग्ध भर्तियां।
अनुदान में धांधली: सरकारी सहायता और शैक्षिक अनुदान के धन का अनधिकृत रूप से उपयोग।
परिजनों को फायदा: अपने बेटे के खाते में लगभग 9.75 लाख रुपये जितनी रकम नियमों के विरुद्ध भेजने के गंभीर आरोप।
निजी खरीदारी की रसीदें विश्वविद्यालय से कैसे मंजूर हुईं?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि विश्वविद्यालय के लेखा विभाग और वित्तीय अधिकारियों की नजरों के सामने से पूर्व कुलपति की निजी खरीदारी, सौंदर्य सामग्री और कपड़ों के भुगतान सरकारी दस्तावेजों में कैसे मंजूर हो गए? विदेशी मुद्रा में हुए इन निजी खर्चों को किस सरकारी मद के तहत दिखाकर मंजूर किया गया, इस बारे में भी बड़े पैमाने पर घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली इस घटना के सामने आने के बाद अब शैक्षिक हलकों और पूरे राज्य में भारी चर्चा शुरू हो गई है। उच्च स्तर से इस पूरे वित्तीय घोटाले की निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की उग्र मांग उठ रही है।

