करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद गरीब बनकर फ्लैट हड़पा, वापस किराए पर देकर कमाई करने लगे: भ्रष्ट नीतियों के खिलाफ जनता में चांडाल का गुस्सा!
राजकोट। नगर निगम (आरएमसी) में सत्ता के नशे में चूर हुक्मरानों की एक और शर्मनाक और नंगी सच्चाई सामने आई है। चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राजकोट की उप महापौर दर्शनबेन वासानी ने झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में बहुत गरीब और बेसहारा परिवारों को जो सरकारी घर दिए थे, वे झूठे और फर्जी कागज़ात के आधार पर लिए गए थे। करोड़पति नेताओं द्वारा गरीबों के सिर से छत छीनकर अपने घर भरने की नीति अपनाने से पूरे राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है।
करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद गरीब लाभार्थी बनने का पाप!
चुनाव के दौरान जमा किए गए अपने आधिकारिक शपथ पत्र में करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति बताने वाली उप महापौर दर्शनबेन वासानी को झुग्गी-झोपड़ी हटाने और गरीब आवास योजना के तहत फ्लैट कैसे मिल गया? यही सबसे बड़ा सवाल है। एक बड़े नेता का ऐसी योजना पर अपना हक जताना, जो सिर्फ़ झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले और गुज़ारे के लिए जूझ रहे बहुत गरीब परिवारों के लिए है, कानून और नैतिकता दोनों को तोड़ने जैसा है।
घर लिया और फिर किराए पर दे दिया: भ्रष्टाचार की हदें
यह घोटाला सिर्फ़ घर लेने तक ही सीमित नहीं था। जांच और स्थानीय बातचीत से पता चला है कि सरकारी घर मिलने के बाद उसे किसी दूसरे व्यक्ति को किराए पर भी दे दिया गया और उससे महीने की कमाई भी हो रही थी! गरीबों के लिए बने घर को अतिरिक्त आय का ज़रिया बनाने की इस सोच ने नगर निगम की पारदर्शिता पर एक बड़ा दाग लगा दिया है।
जनता के कड़े सवाल और भारी गुस्सा:
इस खुलासे के बाद, राजकोट की जनता और विरोधी दल सीधे और तीखे सवाल पूछ रहे हैं: जब झुग्गी-झोपड़ियों के असली हकदार गरीब परिवार आज भी खुले में या छप्पर के नीचे रहने को मजबूर हैं, तो इन अमीर नेताओं को किस नियम के तहत घर दिए गए? क्या नगर निगम के अधिकारियों ने बिना दस्तावेज़ों का सत्यापन किए आँख बंद करके यह आवंटन किया? क्या गरीबों के हक को कुचलने वाले ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सिर्फ कागजी जांच होगी, या उन्हें उनके पदों से बर्खास्त कर कानूनी आपराधिक कार्रवाई की जाएगी?
तुरंत इस्तीफे और सख्त कार्रवाई की मांग
गांधी के गुजरात में गरीबों और वंचित वर्गों के हक को इस तरह कुचलने वाले शासकों के खिलाफ जनता का गुस्सा चरम पर है। नागरिक और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि दर्शनबेन वासानी तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें, घोटाले से मिले घर को तुरंत जब्त करके किसी असली जरूरतमंद गरीब परिवार को दिया जाए, और झूठे दस्तावेज जमा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

