मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी राधाकृष्ण विखे पाटिल पर आरोप लगाए हैं। वहीं देवेंद्र फडणवीस और मंत्री का भी बयान आया है। जालना में माहौल गरमाता जा रहा है और मामला अभी शांत होता नहीं दिख रहा है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को मराठा आरक्षण के चल रहे मुद्दे और एक्टिविस्ट मनोज जरांगे पाटिल की नई मांगों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने मराठा समुदाय के फायदे और कल्याण के लिए बड़े फैसले किए हैं और आगे भी लेती रहेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुदाय को सिर्फ कागजी वादों के बजाय सरकार के पिछले फैसलों से असल फायदे मिले हैं। इस बीच, महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मंगलवार को साफ किया कि उनसे मिलने के लिए कोई सरकारी प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने इस मुद्दे को हल करने के लिए पहले ही सभी उपलब्ध उपाय कर लिए हैं।
देवेंद्र फडणवीस वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के जेएनपीटी-नया उमरगाम हिस्से के उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान सीएम फडणवीस ने फिर कहा कि मराठा समुदाय को दिया जाने वाला कोई भी आरक्षण संवैधानिक दायरे में होना चाहिए। उसे कानूनी जांच में खरा उतरना चाहिए। उन्होंने कानूनी दायरे से बाहर के ऐसे समाधानों के खिलाफ चेतावनी दी जो शायद कोर्ट की समीक्षा में टिक न पाएं।
देवेंद्र फडणवीस बोले- बातचीत के रास्ते खुले
मुख्यमंत्री ने सरकार का यह रुख दोहराया कि मराठों को आरक्षण का फायदा देने से दूसरे समूहों को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हम किसी और का हक छीनकर किसी और को नहीं देंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ओबीसी कोटा सुरक्षित रहेगा। मनोज जरांगे पाटिल के चल रहे विरोध और मांगों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि बातचीत के लिए दरवाजे हमेशा खुले हैं। अगर सरकार के फैसलों को लेकर कोई शक, कमी या गलतफहमी है तो राज्य सरकार बैठकर उन्हें साफ करने और सुलझाने के लिए तैयार है।
मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की दो टूक
वहीं महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने साफ कहा कि मनोज जरांगे से मिलने के लिए कोई भी सरकारी प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा जाएगा। प्रशासन ने इस मुद्दे को हल करने के लिए पहले ही सभी उपलब्ध उपाय कर लिए हैं। हालांकि मंत्री उदय सामंत और भाजपा विधायक प्रसाद लाड के साथ आधी रात को हुई फोन पर बातचीत के बाद जरांगे पाटिल ने अपना मेडिकल इलाज फिर से शुरू कर दिया है, लेकिन वे आरक्षण लागू करने की अपनी मुख्य मांगों पर अडिग हैं।
मनोज जारांगे पाटिल के रुख पर टिप्पणी करते हुए मराठा आरक्षण पर कैबिनेट उप-समिति के अध्यक्ष मंत्री विखे पाटिल ने कहा कि कार्यकर्ता को अपनी बात पर कायम रहने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने दोहराया कि सरकार ने मराठा समुदाय के व्यापक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया है।
‘सरकार ने अपनी तरफ से उठाए हैं कदम’
मंत्री विखे पाटिल ने कहा कि अगर जारांगे पाटिल अपनी बात पर अड़े रहते हैं, तो यह उनका फैसला है। सरकार ने अपनी तरफ से सभी जरूरी कदम उठाए हैं, फिर भी वे असंतुष्ट हैं। हम बाकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं और हमारे फैसलों को लागू करने का काम पहले से ही चल रहा है। इस समय, मेरे पास उन्हें संतुष्ट करने के लिए कोई और विकल्प नहीं है।
इस बीच मराठा आरक्षण के लिए मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल जारी है और उनकी तबीयत बिगड़ गई है। मंत्रियों उदय सामंत और प्रसाद लाड से फोन पर बातचीत के बाद, वे फोर फ्लूइड (सलाइन) लेने को तैयार हो गए, हालांकि वे अपनी सभी मांगें पूरी होने तक उपवास खत्म न करने के अपने रुख पर अड़े हुए हैं।

