‘महानगर मेट्रो ‘ की खास रिपोर्ट — पीड़िता के साथ इंसानियत की बेइज्ज़ती और पुलिस की लापरवाही के खिलाफ NHRC का कड़ा रुख
अमरेली के चर्चित ‘पायल गोटी लेटर केस’ मामले में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) ने एक बहुत ही अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ह्यूमन राइट्स के उल्लंघन और पुलिस सिस्टम की गंभीर लापरवाही को ध्यान में रखते हुए, नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने गुजरात सरकार को पीड़िता पायल गोटी को ₹7.5 लाख का आर्थिक मुआवजा देने का साफ आदेश दिया है।
क्या था पूरा ‘पायल गोटी लेटर केस’?
अमरेली में एक नकली या जाली लेटर (पत्र) के कथित तौर पर वायरल होने पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी हंगामा हुआ था। इस केस की जांच के दौरान, पीड़िता पायल गोटी और उसके परिवार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए गए:
अमानवीय व्यवहार और मानवाधिकारों का उल्लंघन: कमीशन के सामने आरोप लगाया गया कि पुलिस ने जांच के दौरान कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना पीड़िता के साथ बुरा बर्ताव किया।
जांच एजेंसी की लापरवाही: आरोप लगाया गया कि पूरे मामले की जांच में निष्पक्षता बनाए रखने के बजाय, ऐसा माहौल बनाया गया जिससे पीड़िता का मानसिक और सामाजिक शोषण हुआ।
NHRC का कड़ा फैसला और सरकार को आदेश
इस पूरे मामले में ह्यूमन राइट्स कमीशन को दी गई रिप्रेजेंटेशन और भेजी गई रिपोर्ट की पूरी जांच के बाद, NHRC ने यह फैसला सुनाया है:
- ₹7.5 लाख का मुआवजा: कमीशन ने राज्य सरकार को पीड़िता के मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए तुरंत 7.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
- जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग: यह भी कहा गया है कि कानून लागू करने में नाकाम रहने वाले और पुलिस पावर का गलत इस्तेमाल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘महानगर मेट्रो ‘ का ज़मीनी सवाल:
इस फ़ैसले से यह साबित होता है कि अथॉरिटी या पुलिस सिस्टम कितना भी मज़बूत क्यों न हो, कोई भी कानून और ह्यूमन राइट्स से ऊपर नहीं है। क्या सरकार कमीशन के इस आदेश का तुरंत पालन करेगी और पीड़ित को इंसाफ़ दिलाएगी?
‘महानगर मेट्रो’ सच, इंसाफ़ और पीड़ितों के हक़ के लिए आवाज़ उठाता रहेगा!

