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स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ बड़ा खेल: 3,334 टीचर मामूली जोड़ भी नहीं कर पाए, बोर्ड वेरिफिकेशन में बड़ा झटका!

गुजरात सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड (GSEB) की तरफ से 10वीं (SSC) और 12वीं (HSC) की आंसर शीट्स के इवैल्यूएशन के बाद सामने आए आंकड़ों ने पूरे एजुकेशन जगत में हलचल मचा दी है। पता चला है कि राज्य के 3,334 टीचर, जो डिग्री लेकर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते हैं, उन्होंने आंसर शीट्स में मार्क्स जोड़ने में गंभीर गलतियां कीं।

3,334 टीचर्स पर जुर्माना: लगेगा 50 लाख से ज्यादा का जुर्माना

बोर्ड रिजल्ट घोषित होने के बाद जब स्टूडेंट्स ने री-चेकिंग और मार्क्स के वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई किया तो इवैल्यूएशन करने वाले टीचर्स की बड़ी लापरवाही सामने आई:

टीचर्स का डिपार्टमेंटवाइज आंकड़ा: जिन टीचर्स पर जुर्माना लगा है उनमें 10वीं के 1,671, 12वीं जनरल स्ट्रीम के 1,137 और 12वीं साइंस स्ट्रीम के 526 टीचर्स शामिल हैं।

3,334 टीचर्स पर 50 लाख से ज्यादा का जुर्माना हर गलती पर 100 रुपये: बोर्ड के नियमों के मुताबिक, 1 मार्क की गलती पर एक टीचर पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। कुछ मामलों में 100 से ज़्यादा मार्क्स की गंभीर गलतियां देखी गई हैं, जिसकी वजह से कुछ टीचरों पर 10,000 रुपये से ज़्यादा का जुर्माना भी लगाया गया है।

50 लाख से ज़्यादा की रकम वसूली जाएगी: बोर्ड ने इन 3,334 टीचरों से जुर्माने के तौर पर कुल 50 लाख रुपये से ज़्यादा की रकम वसूलने की कार्रवाई की है।

स्टूडेंट्स के भविष्य से खिलवाड़ और पेरेंट्स में ज़बरदस्त गुस्सा

टीचर की एक छोटी सी गलती की वजह से कई होनहार स्टूडेंट्स का रिज़ल्ट खराब हो गया और कुछ पास होने वाले स्टूडेंट्स को फेल घोषित कर दिया गया।

मेंटल टॉर्चर: खुद पर कॉन्फिडेंस होने के बावजूद, बोर्ड पेपर में कम नंबर पाने वाले स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को बहुत मेंटल स्ट्रेस से गुज़रना पड़ा।

एजुकेशन की क्वालिटी पर सवाल: जो टीचर असेसमेंट में जनरल जोड़-तोड़ में गलती करते हैं, वे स्कूलों में स्टूडेंट्स को मैथ्स या दूसरे सब्जेक्ट्स किस क्वालिटी से पढ़ाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है। सिर्फ़ जुर्माना काफ़ी नहीं, ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए

बोर्ड ने इन सभी टीचरों को 7 दिनों के अंदर जुर्माना भरने का आदेश दिया है, लेकिन सिर्फ़ 100 रुपये या 1,000 रुपये का जुर्माना लगाने से इस गंभीर समस्या का हल नहीं हो सकता। माता-पिता और जागरूक नागरिकों की मांग है कि ऐसे गंभीर लापरवाह टीचरों के ख़िलाफ़ सख़्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए, उनके लिए री-ट्रेनिंग और इवैल्यूएशन ट्रेनिंग का आयोजन किया जाए और एक मज़बूत सिस्टम बनाया जाए ताकि भविष्य में स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो सके।

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