अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) के भ्रष्ट एडमिनिस्ट्रेशन और अधिकारियों की आंखें मूंद लेने की पॉलिसी पर एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। नरोदा इलाके में करोड़ों की लागत से बन रहे फ्लाईओवर का कंस्ट्रक्शन का काम अभी पूरा भी नहीं हुआ है, जबकि ब्रिज पर पेंटिंग का काम (पेंटिंग) जल्दबाजी में शुरू कर दिया गया है। स्ट्रक्चरल काम और सेफ्टी टेस्टिंग बाकी होने के बावजूद, आरोप लग रहे हैं कि उद्घाटन का दिखावा करने या गड़बड़ियों को छिपाने के लिए इतनी बड़ी लापरवाही दिखाई जा रही है।
कॉन्ट्रैक्टर और अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल
ब्रिज का कंस्ट्रक्शन अभी अधूरा है, रोड और सीमेंट सेफ्टी का प्राइमरी वेरिफिकेशन बाकी है, फिर भी किसके कहने पर ब्रिज को पेंट करके “तैयार” दिखाने का खेल चल रहा है?
करोड़ों का बजट खर्च, फिर भी लापरवाही: AMC सिस्टम जनता के टैक्स का पैसा जला रहा है। अधूरे काम पर पेंटिंग करके कौन सी चोरी छिपाने की कोशिश की जा रही है?
लीडरशिप और एडमिनिस्ट्रेशन की चुप्पी: इतनी बड़ी लापरवाही और गड़बड़ियां सामने आने के बाद भी मेयर और म्युनिसिपल कमिश्नर ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
करप्शन का शक: लोकल लोगों का आरोप है कि यह जल्दबाजी सिर्फ ब्रिज कंप्लीशन सर्टिफिकेट या सिक्योरिटी क्लीयरेंस के बिना पेंटिंग बिल पास करवाने और कॉन्ट्रैक्टर को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है।
सख्त एक्शन और लीगल जांच की मांग
अब नरोदा ब्रिज की इस गड़बड़ी को लेकर लोगों में बहुत गुस्सा है:
कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैकलिस्ट करें: अधूरे काम पर पेंटिंग करने और सेफ्टी नियमों को तोड़ने वाली एजेंसी/कॉन्ट्रैक्टर के खिलाफ तुरंत पेनल्टी एक्शन लिया जाए और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एक्शन: AMC के इंजीनियर और सुपरवाइजिंग ऑफिसर जो प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग करने में फेल रहे, उन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाए और एक जांच कमेटी बनाई जाए।
क्वालिटी और सेफ्टी ऑडिट: ब्रिज के पूरे कंस्ट्रक्शन का इंस्पेक्शन बिना किसी भेदभाव के थर्ड-पार्टी ऑडिट से किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई बड़ी मुसीबत न आए।

