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भायली गैंगरेप केस में ऐतिहासिक इंसाफ: सभी पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा, वडोदरा POCSO कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला!

नवरात्रि के पवित्र त्योहार को बदनाम करने वाले आरोपियों को उम्रकैद की सजा, वडोदरा कोर्ट ने लोगों को दिया कड़ा संदेश

वडोदरा: वडोदरा स्पेशल POCSO कोर्ट ने नवरात्रि की रात हुए पूरे गुजरात को हिला देने वाले खौफनाक भायली गैंगरेप केस में ऐतिहासिक और मिसाल देने वाला फैसला सुनाया है। साल 2024 में दूसरे नवरात्रि की रात गरबा खेलकर लौट रही नाबालिग से गैंगरेप करने वाले सभी पांचों आरोपियों को आखिरी सांस तक सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

कोर्ट ने सभी आरोपियों पर भारी जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले से आखिरकार पीड़िता और उसके परिवार को इंसाफ मिला है, वहीं अपराधियों पर समाज पर एक बड़ा कानूनी चाबुक चला है।

क्या थी वह काली रात की खौफनाक घटना?

अक्टूबर 2024 में नवरात्रि की दूसरी रात, भायली इलाके में गरबा खेलकर अपनी दोस्त के साथ लौट रही एक 16 साल की लड़की को इन अपराधियों ने एक अनजान जगह पर घेर लिया।

धमकी और टॉर्चर: आरोपी मुन्ना अब्बास बंजारा, ममताज उर्फ ​​आफताब बंजारा, शाहरुख बंजारा, सैफ अली बंजारा और अजमल बंजारा नाम के पांच अपराधी बाइक पर आए और लड़की और उसकी दोस्त को धमकाया।

ज़ुल्म की हद: गाड़ी की चाबी छीनने के बाद, परिवार को बताने की धमकी देते हुए, नाबालिग के दोस्त को पीटा गया और उन पांचों ने बारी-बारी से मासूम नाबालिग के साथ गैंगरेप किया।

पुलिस की पक्की जांच और साइंटिफिक सबूत

घटना के बाद वडोदरा समेत पूरे गुजरात राज्य में गुस्से का ज्वालामुखी फूट पड़ा। वडोदरा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तंदलजा इलाके के रहने वाले सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

जांच के दौरान, पुलिस ने करीब 45 गवाहों के बयान दर्ज किए। कोर्ट के सामने 350 से ज़्यादा फिजिकल और साइंटिफिक सबूत जैसे फॉरेंसिक साइंस (FSL), पीड़िता के कपड़ों पर मिले DNA मैचिंग और CCTV फुटेज पेश किए गए।

सरकारी वकील और उनकी टीम ने कोर्ट में मज़बूत दलीलें दीं कि ऐसे अपराधी समाज के लिए कैंसर की तरह हैं और उन्हें किसी भी हालत में दया का हकदार नहीं माना जा सकता।

कोर्ट का सख्त संदेश: सूरज डूब जाएगा लेकिन जेल के दरवाज़े नहीं खुलेंगे!

वडोदरा POCSO कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ किया कि यह जुर्म बहुत गंभीर, क्रूर और इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। आरोपियों को आम उम्रकैद नहीं, बल्कि “आखिरी सांस तक उम्रकैद” देना सही होगा, ताकि वे कभी जेल से बाहर न आ सकें और समाज के लिए खतरा न बन सकें।

महानगर मेट्रो न्यूज़ थॉट:

नवरात्रि जैसे पवित्र त्योहार पर गरबा खेलकर घर जा रही बेटी पर मिलकर ज़ुल्म करने वालों को कुदरत और कानून दोनों ने सबक सिखाया है। वडोदरा कोर्ट का उन्हें आखिरी सांस तक जेल में रखने का यह फैसला सिर्फ एक केस का फैसला नहीं है, बल्कि बिगड़ी हुई सोच वाले सभी अपराधियों के कानों पर एक करारा झटका है।

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