मध्य प्रदेश के रीवा जिले में गांधी मेमोरियल अस्पताल में गर्भवती महिला और अजन्मे बच्चे की मौत के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने दो डॉक्टरों समेत 4 लोगों को निलंबित कर दिया है। जांच के लिए कमेटी गठित की गई है।
हाइलाइट्स
इलाज में लापरवाही से गर्भवती महिला और बच्चे की मौत
प्रशासन ने की सख्त कार्रवाई, दो डॉक्टर समेत 4 सस्पेंड
डेप्युटी सीएम ने कहा- प्रॉटोकाल का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता
मामले की जांच के लिए विशेष कमेटी का गठन किया गया
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गांधी मेमोरियल अस्पताल में एक गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत के बाद सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। मामले में दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों समेत 4 लोगों को निलंबित कर दिया गया है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही चिकित्सा लापरवाही और महिला के परिवार के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है।
सरकार की प्राथमिकता नहीं है
डेप्युटी सीएम राजेन्द्र शुक्ला ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा और निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मरीजों और उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार के साथ-साथ निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर तथ्यों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे।
क्या है मामला
रीवा जिले के बैकुंठपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत हटवा गांव की निवासी अमित मिश्रा ने अपनी पत्नी कल्पना मिश्रा को 28 अगस्त को सुबह लगभग 2:38 बजे गांधी मेमोरियल अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग में भर्ती कराया गया था। उसी दिन रात लगभग 11:55 बजे उनकी और उनके अजन्मे बच्चे की मृत्यु हो गई।
प्लेटलेट की संख्या में हुई थी वृद्धि
चिकित्सा रिकॉर्ड से पता चला कि जब उन्हें भर्ती कराया गया था तब उनके प्लेटलेट की संख्या लगभग 30,000 प्रति माइक्रोलीटर थी। उनका रक्तचाप बहुत अधिक था और लिवर एंजाइम भी उच्च स्तर पर पाए गए। डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और एचईएलएलपी सिंड्रोम के साथ-साथ पूर्ण अवधि की गर्भावस्था से ग्रसित पाया। सरकार ने कहा कि निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाएं शुरू की गईं।
किन अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई
बाद में परिवार ने दुर्व्यवहार और उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की सोनल अग्रवाल और एनेस्थीसिया विभाग की निधि पांडे को प्रथम दृष्टया कर्तव्य में घोर लापरवाही और गंभीर अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। दोनों नर्सिंग अधिकारियों को परिवार के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद निलंबित किया गया।
परिजनों को सौंपा गया शव
आरोपों की जांच के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की एक समिति गठित की गई है। परिवार की मांग पर रीवा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की एक संयुक्त टीम ने महिला और उसके अजन्मे बच्चे का पोस्टमार्टम कराया। आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, शवों को शव वाहन द्वारा उनके पैतृक गांव ले जाया गया।

