कुशीनगर जिले के पडरौना राजदरबार की सीलिंग भूमि के करीब 44 वर्षों से चल रहे कानूनी विवाद के बाद अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) अंतिम आदेश पारित किया।
यूपी के कुशीनगर जिले के पडरौना राजदरबार की 1503.57 एकड़ सीलिंग भूमि अब राज्य सरकार कब्जा हो गया है। करीब 44 वर्षों से चल रहे कानूनी विवाद के बाद अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) कुशीनगर ने 14 अगस्त 2026 को मामले में अंतिम आदेश पारित किया। आदेश के तहत विधिक उत्तराधिकारियों के उपयोग के लिए 18.04 एकड़ सिंचित भूमि छोड़ते हुए शेष 1503.57 एकड़ भूमि को अतिरिक्त घोषित कर राज्य सरकार के अधीन कर दिया गया।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर मामले की प्रभावी पैरवी और लगातार निगरानी की गई। प्रशासन के मुताबिक, अब इस जमीन का इस्तेमाल भूमिहीन और गरीब परिवारों को नियमानुसार कृषि एवं आवासीय पट्टा देने के साथ ही स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, खेल मैदान, पंचायत भवन सहित अन्य जनकल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकेगा।
1978 में शुरू हुई थी सीलिंग कार्रवाई
पडरौना राजदरबार की मृतक खातेदार रानी रेवती देवी पत्नी स्वर्गीय रवि प्रताप नरायन सिंह की पडरौना, खड्डा, कसया और कप्तानगंज तहसील में स्थित भूमि पर उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम के तहत सीलिंग की कार्रवाई शुरू हुई थी। 30 नवंबर 1978 को नियत प्राधिकारी ने पुराने सीलिंग अधिनियम के तहत 359.61 एकड़ और संशोधित अधिनियम के तहत 66.75 एकड़ सिंचित भूमि को अतिरिक्त घोषित किया था।
इस आदेश के खिलाफ खातेदार ने तत्कालीन जिला जज, देवरिया के यहां अपील की। 3 फरवरी 1982 को अपीलीय न्यायालय ने आदेश निरस्त करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया। इसके बाद रानी रेवती देवी और अन्य की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 21 जनवरी
1983 को हाईकोर्ट ने सीलिंग कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
2026 में हुआ अंतिम फैसला
प्रशासन के अनुसार, हाईकोर्ट में दाखिल याचिका 5 जुलाई 2002 को (डिसमिस्ड इन डिफॉल्ट) हो गई। इसके साथ ही सीलिंग कार्रवाई पर लगा स्थगन आदेश भी समाप्त हो गया। इसके बावजूद जमीन को लेकर विवाद और बिक्री के प्रयास जारी रहने की बात प्रशासन ने कही है।
अब 14 अगस्त 2026 को पारित आदेश के बाद 1503.57 एकड़ जमीन राज्य सरकार के अधीन आ गई है। इसमें सबसे अधिक 1127.43 एकड़ जमीन खड्डा तहसील की है। वहीं पडरौना तहसील में 339.54 एकड़, कसया में 10 एकड़ और कप्तानगंज में 26.60 एकड़ भूमि शामिल है।
खतौनी में दर्ज होगी जमीन
प्रशासन के मुताबिक, पूरी 1503.57 एकड़ भूमि को राजस्व अभिलेखों यानी खतौनी में राज्य सरकार व सीलिंग मद में दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। इसके बाद पात्र भूमिहीन, गरीब और अनुसूचित जाति-जनजाति के परिवारों को नियमानुसार कृषि और आवासीय पट्टे दिए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
सीलिंग भूमि पर किसी तरह का अवैध कब्जा मिलने पर प्रशासन ने संबंधित लोगों को बेदखल करने और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की बात कही है। प्रशासन का कहना है कि इस फैसले से लंबे समय से लंबित भूमि विवाद का समाधान होने के साथ ही क्षेत्र में विकास और जनकल्याण के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध होगी।

