भावनगर में लट्ठा कांड की दुखद घटना ने एक बार फिर पूरे गुजरात को झकझोर कर रख दिया है। गांधी और सरदार के इस राज्य में ‘कागज़ पर शराबबंदी’ के दावों के बीच, ज़हरीली शराब के धंधे ने कई बेगुनाह लोगों की जान ले ली है। शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार और पुलिस सिस्टम इस घटना के बाद एक बार फिर ठप हो गया है। लट्ठा कांड में जले बेगुनाह लोगों के परिजनों की चीख-पुकार ने न सिर्फ़ भावनगर बल्कि पूरे गुजरात में ज़बरदस्त जनाक्रोश और अफ़रा-तफ़री फैला दी है।
विपक्ष के ज़बरदस्त हमले: “क्या बिना रंगदारी के यह काला धंधा मुमकिन है?”
भावनगर की घटना के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्य नेता गोपाल इटालिया ने सरकार की पॉलिसी और पुलिस सिस्टम की नाकामी पर सीधे और ज़बरदस्त हमले किए हैं। विपक्ष ने साफ आरोप लगाया है कि लोकल पुलिस और पॉलिटिकल आकाओं की मेहरबानी के बिना ज़हरीली शराब का हर कोने तक पहुंचना नामुमकिन है। छोटे-बड़े शराब तस्करों को पकड़कर केस खत्म करने के बजाय, इस काले धंधे के आकाओं और किश्तें वसूलने वाले काले धन के पार्टनरों पर कार्रवाई कब होगी? ऐसे सुलगते सवाल उठाए गए हैं।
बर्बाद हुए परिवारों और जनता का गुस्सा: शराबबंदी या सिर्फ दिखावा?
हर बार जब कोई मुसीबत आती है, तो सिस्टम अचानक ‘स्पेशल ड्राइव’ का ड्रामा शुरू कर देता है। दो-चार दिन रेड होती है, मीडिया में केस के आंकड़े दिखाए जाते हैं और कुछ ही दिनों में हालात फिर ‘घी में घी’ जैसे हो जाते हैं। लट्ठा कांड में जान गंवाने वाले परिवारों ने अपने कमाने वाले खो दिए हैं। जैसे-जैसे मासूम परिवार अनाथ हो रहे हैं, जनता पूछ रही है – क्या राज्य में कानून और सुरक्षा सिर्फ कागजों पर ही रहेगी या आम लोगों की जान की कोई कीमत है?
सख्त कार्रवाई की ज़ोरदार मांग: खाकी और नेताओं की ज़िम्मेदारी कब तय होगी?
अब ज़मीनी स्तर पर लोगों में गुस्सा है कि सिर्फ़ कुछ समय की छापेमारी से यह बुराई खत्म नहीं होगी। गैर-कानूनी शराब के धंधे में शामिल बड़े माफियाओं, भ्रष्ट अधिकारियों और उन्हें संरक्षण देने वाले नेताओं के खिलाफ ‘गुंडम एक्ट’ और सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। यह ज़ोरदार मांग की गई है कि जिस इलाके में लता की घटना हुई, वहां के बड़े पुलिस अधिकारियों को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया जाए और उन्हें नौकरी से निकाला जाए।
‘महानगर मेट्रो’ से सीधा सवाल
क्या भावनगर की घटना भी पिछले मामलों की तरह सिर्फ़ जांच कमेटियों की रिपोर्ट में ही दब जाएगी? क्या सिस्टम हर बार ऐसी मुसीबतों के बाद ही जागेगा? अगर शराबबंदी कानून को सही मायने में लागू करना है, तो कागजी कार्रवाई बंद करके भ्रष्टाचार की जड़ें काटनी होंगी। ‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ पीड़ित परिवारों के साथ मज़बूती से खड़ा है और जब तक ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक सरकार और पुलिस सिस्टम से सवाल पूछता रहेगा!

