दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन ठगी की जांच में म्यूल बैंक अकाउंट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। मामले में बैंक मैनेजर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि चार बैंक अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई हुई। जांच में 70 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन का खुलासा हुआ।
नई दिल्ली: सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने 10 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी की शिकायत की जांच करते हुए देशव्यापी म्यूल बैंक अकाउंट सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए मैनेजर समेत 10 आरोपियों पर कार्रवाई की है। इसमें 6 को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 4 को बाउंड डाउन किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में से एक आरोपी बैंक का मैनेजर है, जबकि बाउंड डाउन किए गए चारों एक प्राइवेट बैंक के अधिकारी हैं।
गिरोह के भंडाफोड़ के बाद बरामद 248 बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ से अधिक के लेन-देन का पता चला है। ये खाते देशभर के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 156 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े पाए गए, जिनमें करीब 20 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। अब तक 56 लाख की राशि फ्रीज की जा चुकी है। जांच में पता चला कि गिरोह के तार दुबई और ब्रिटेन तक जुड़े हैं। भारत में फरार सरगना और यूएई में बैठे मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।
4 लोगों को किया गया बाउंड डाउन, ये चारों एक प्राइवेट बैंक के अधिकारी
इस गिरोह के ब्रिटेन और दुबई तक जुड़े हुए हैं तार, मास्टर माइंड की है तलाश
3-4 साल से सक्रिय था सिंडिकेट
डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि यह गिरोह पिछले 3 से 4 वर्षों से भारत के अलावा दुबई और ब्रिटेन में सक्रिय साइबर ठगों को कॉरपोरेट करंट बैंक अकाउंट उपलब्ध करा रहा था। मामले में सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के मैनेजर कुंदन कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इंडसइंड बैंक के चार अधिकारियों/सहयोगियों को हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई (बाउंड डाउन) की गई है। पुलिस ने गिरोह से 248 बैंक अकाउंट किट, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल फोन, 28 फर्जी कंपनी की मुहरें, 55 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 1 लाख कैश और एक मारुति ब्रेजा कार बरामद की है।
इस तरह एक केस से खुल गए कई मामले
डीसीपी ने बताया कि पटेल नगर के पंजाबी बस्ती निवासी एक पीड़ित ने शिकायत दी थी कि जॉब के नाम पर 10 हजार रुपये की ठगी हुई है। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा ‘डेमियन ट्रेडर्स’ नाम की फर्जी फर्म के करंट अकाउंट में पहुंचा था। डिजिटल प्रोफाइलिंग के जरिए पुलिस पहले मोहित सोनी तक पहुंची, जिसे 8 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।

