धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा दिल्ली की सत्ता के गलियारों के लिए सबसे बड़ा झटका क्यों बना?
नई दिल्ली। केंद्रीय राजनीति के इतिहास में एक ऐसी घटना हुई है जिसने दिल्ली में सत्ता के समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा सिर्फ़ एक मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं है, बल्कि इसे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए अब तक का सबसे बड़ा नैतिक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है। एक दशक से ज़्यादा के शासनकाल में यह पहली बार है जब सत्ताधारी पार्टी के किसी मंत्री को एक बड़े जन-आंदोलन और छात्रों के आक्रोश के आगे झुककर इस्तीफ़ा देना पड़ा है।
‘अजेय’ छवि को बड़ा झटका
मोदी सरकार की पहचान अब तक ऐसी रही है कि वह किसी भी विरोध, विपक्ष के हंगामे या आंदोलन के बीच भी अपने फ़ैसलों या नेताओं का बचाव करती रही है। देश में पहले भी कई बड़े आंदोलन हुए हैं, लेकिन आंदोलन के दबाव में कैबिनेट के किसी सदस्य का इस्तीफ़ा नहीं लिया गया। लेकिन नीट पेपर लीक और परीक्षा घोटाले के बाद, देश भर में छात्रों और युवा शक्ति द्वारा सड़कों पर उतरकर अपनाए गए आक्रामक रुख ने सरकार को बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया।
छात्रों और कई संगठनों के विरोध-प्रदर्शन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा जिस तरह सामने आया है, उसने यह साबित कर दिया है कि जब जनता का गुस्सा हद पार कर जाता है, तो सत्ता की कुर्सियाँ भी डगमगाने लगती हैं।
इस घटना को ‘गेम चेंजर’ क्यों माना जाएगा?
- युवा शक्ति की जीत: देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ हुई गड़बड़ी के ख़िलाफ़ उठाई गई आवाज़ आख़िरकार दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक पहुँची। इस घटना ने साबित कर दिया कि अगर छात्र और युवा एकजुट हों, तो वे केंद्र सरकार पर भी दबाव बना सकते हैं।
- विपक्ष को मिला नया संजीवनी बूस्टर: अब तक विपक्षी दल सरकार के ख़िलाफ़ मुद्दे तो उठा रहे थे, लेकिन वे सरकार से कोई बड़ा इस्तीफ़ा लेने में नाकाम रहे थे। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के साथ, विपक्ष को अन्य मुद्दों पर भी सरकार को घेरने के लिए एक बड़ा हथियार मिल गया है। 3. सरकार के लिए ‘चेतावनी का संकेत’: सत्ता के गलियारों में इस घटना को भविष्य के लिए एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अब से, सरकार के लिए जनता के विरोध को नज़रअंदाज़ करना या आंदोलनों को हल्के में लेना आसान नहीं होगा।
इसका भविष्य की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
शिक्षा मंत्रालय में हुई इस घटना और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद, अब दूसरे मंत्रालयों में भी जवाबदेही का मुद्दा ज़ोर पकड़ेगा। इस फ़ैसले ने मोदी सरकार की ‘कभी न झुकने वाली’ छवि को तोड़ दिया है और यह साफ़ कर दिया है कि लोकतंत्र में असली ताक़त सिर्फ़ जनता की आवाज़ में ही होती है।

