पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद दीया मिर्जा ने उठाए गंभीर सवाल, सोशल मीडिया पर यूजर्स और विपक्ष के बीच जमकर चर्चा!
मुंबई/नई दिल्ली: NEET एग्जाम में गड़बड़ी और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर देशभर में लाखों स्टूडेंट्स, युवा और पेरेंट्स सड़कों पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग कोनों में युवा अपने भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं। इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर इशारा किया था कि पेपर लीक के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। लेकिन इस पोस्ट के बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा के रिएक्शन ने सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। दीया मिर्जा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर प्रधानमंत्री के पोस्ट पर रिएक्ट करते हुए सीधे पूछा, “आपको कुछ कहने में 47 दिन लग गए…”
दीया मिर्जा के इस बयान से पॉलिटिकल और सेलेब सर्कल में हलचल मच गई है
एक्ट्रेस दीया मिर्जा का यह बयान सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। यह पहली बार है जब किसी बड़ी बॉलीवुड हस्ती ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच इतने कड़े शब्दों में प्रधानमंत्री की चुप्पी और देरी पर सीधे सवाल उठाए हैं।
47 दिनों की चुप्पी पर हमला: दीया मिर्जा का इशारा था कि जब देश के लाखों युवा सड़कों पर थे और अपने भविष्य के लिए रो रहे थे, तो इतने दिनों तक अधिकारियों की तरफ से तुरंत कोई साफ जवाब क्यों नहीं आया?
युवाओं का सपोर्ट या पब्लिसिटी?: दीया मिर्जा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर दो ग्रुप बन गए हैं। एक तरफ युवा और छात्र उनके बोल्ड कदम और सवाल पूछने की हिम्मत का स्वागत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार के सपोर्टर इसे पब्लिसिटी स्टंट या पॉलिटिकल एजेंडा का हिस्सा बता रहे हैं।
‘महानगर मेट्रो ‘ एनालिसिस: क्या सेलेब्स की चुप्पी टूट गई है या यह घटनाओं का एक नया मोड़ है?
आमतौर पर बॉलीवुड के बड़े एक्टर देश के सेंसिटिव या पॉलिटिकल मुद्दों पर बोलने से बचते हैं। लेकिन NEET-UG पेपर लीक और स्टूडेंट्स के भविष्य का मुद्दा इतना सीरियस हो गया है कि अब एंटरटेनमेंट की दुनिया से भी विरोध की आवाज़ें उठ रही हैं।
दिया मिर्ज़ा का यह कमेंट सिर्फ़ एक एक्ट्रेस की राय नहीं है, बल्कि यह देश के उन सभी युवाओं और पेरेंट्स का दर्द है जो कई दिनों से सही एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन और अकाउंटेबिलिटी का इंतज़ार कर रहे हैं।
अब देखना यह है कि क्या केंद्र सरकार के आने वाले फैसले स्टूडेंट्स की नाराज़गी को शांत करेंगे या ऐसे मुश्किल सवालों का सिलसिला और भी तेज़ होगा!

