पोते की मौत से दादी का भी दिल बैठ गया! ‘
खेड़ुत कल्याण संगठन’ के प्रेसिडेंट भरतभाई वाला के प्रशासन पर दोहरी मुसीबत
भावनगर/महुवा : सौराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की बड़ी लापरवाही और कागजों पर किए गए काम अब मासूम इंसानों की जान के लिए मौत का कारण बन रहे हैं। भावनगर जिले के महुवा तालुका के बाम्हनिया गांव में आदमखोर तेंदुए के आतंक ने एक खुशहाल परिवार को तबाह कर दिया है। तेंदुए ने एक मासूम बच्चे पर जानलेवा हमला कर उसे मार डाला। इस दिल दहला देने वाली घटना का सदमा बर्दाश्त न कर पाने पर बच्चे की दादी की भी हार्ट अटैक से दुखद मौत हो गई। एक ही परिवार में कुछ ही घंटों के अंदर हुई इस दोहरी मुसीबत ने पूरे सौराष्ट्र इलाके में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के खिलाफ भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। दादी और पोता एक साथ जले: फॉरेस्ट डिपार्टमेंट सो रहा था और काल ने मार डाला!
बांभानिया गांव के बॉर्डर एरिया में हुई इस घटना के लिए सीधे तौर पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के निकम्मे अधिकारी जिम्मेदार हैं जो सिर्फ सरकारी ऑफिस के AC कमरों में मीटिंग करते हैं।
मासूम का शिकार: रात में वाड़ी एरिया में अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया और एक मासूम बच्चे को अपना शिकार बना लिया। जब मासूम का बेजान शरीर लहूलुहान हालत में मिला तो पूरा गांव सदमे में आ गया।
दिल दहला देने वाला सदमा: अपने प्यारे पोते को खून से लथपथ और मौत के मुंह में देखकर दादी का दिल इस भयानक सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सका। आंसुओं से लथपथ दादी का दिल टूट गया और उनकी भी मौके पर ही मौत हो गई।
एक ही घर से दो जनाजे उठे: जिस घर में मासूम की किलकारियां गूंजती थीं और दादी की दुआएं होती थीं, आज उसी घर से एक ही समय में दो जनाजे उठे। पत्थर दिल इंसान की आंखें भी नम हो गईं।
“फॉरेस्ट डिपार्टमेंट कुंभकर्ण की नींद से कब जागेगा?” – भरतभाई वाला
इस दोहरी दुखद घटना की खबर मिलते ही ‘खेदूत कल्याण संगठन’ के प्रेसिडेंट भरतभाई वाला मौके पर पहुंचे और सरकारी सिस्टम और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने गुस्से में कहा, “यह कोई आम हादसा नहीं, बल्कि फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की सीधी हत्या है! बार-बार कहने के बाद भी बॉर्डर एरिया में पिंजरे नहीं लगाए जा रहे हैं। किसान और मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात खेतों में काम करते हैं, लेकिन सरकार को सिर्फ शेर और तेंदुओं के आंकड़े दिखाने में दिलचस्पी है। अगर इन आदमखोर तेंदुओं को तुरंत पिंजरे में बंद नहीं किया गया और मरने वालों के परिवारों को सही मुआवजा देकर इंसाफ नहीं मिला, तो किसान संगठन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के ऑफिस में तालाबंदी करेंगे और उग्र आंदोलन करेंगे।”
क्या इंसानी जान सस्ती है और जंगली जानवर कीमती? लोगों में गुस्सा
आज सौराष्ट्र के किसान पूछ रहे हैं कि क्या इंसानी जान की कोई कीमत नहीं है? वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट उड़ाने वाला सिस्टम गांवों के गरीब परिवारों को सुरक्षा देने में पूरी तरह फेल रहा है। सावरकुंडला, महुवा और राजुला पंथकों में ऐसी घटनाएं हर दिन होती हैं, लेकिन सरकार अभी तक कोई पक्का हल नहीं निकाल पाई है।
इस दोहरी मौत के बाद बांभणिया गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। वन विभाग अब पिंजरा लगाने का नाटक करेगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या लापरवाही की वजह से गई वे दो मासूम जानें कभी वापस आ पाएंगी?

