नई दिल्ली/अहमदाबाद: जब देश के नेता सत्ता के नशे में चूर होकर करोड़ों रुपये और AC चैंबर की चमक-दमक में बैठकर सिर्फ भाषण दे रहे हों, तब उसी देश के एक सच्चे सपूत, एक अद्भुत साइंटिस्ट और भारत के असली ‘नूर’ सोनम वांगचुक को दिल्ली की कड़ाके की ठंड और फुटपाथ पर आमरण अनशन पर बैठना पड़े, यह इस लोकतांत्रिक देश के लिए सबसे बड़ी शर्म की बात है। अपनी निजी खुशी, मोह और साइंटिफिक रिसर्च को किनारे रखकर यह आदमी आज दिल्ली की गद्दी के सामने हाथ जोड़कर बैठ गया है।
सवाल सिर्फ लद्दाख का नहीं है, सवाल अब इस देश के 20 मासूम स्टूडेंट्स के भविष्य और इंसाफ का है। जब देश के युवाओं का एजुकेशन सिस्टम और
रोजगार के नाम पर बेरहमी से मजाक उड़ाया जा रहा है, तो सोनम वांगचुक की यह लड़ाई अब सिर्फ एक आंदोलन नहीं, बल्कि सिस्टम बदलने की एक लौ बन गई है। नेताओं की कथित बुद्धिजीवियों के खिलाफ जनता का ज्वलंत सवाल
इस देश की बदकिस्मती देखिए, एक तरफ करोड़ों युवा डिग्री लेकर नौकरी ढूंढते घूम रहे हैं, वहीं देश के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले नेता पब्लिक में आकर बेरोजगार युवाओं को ‘चाय बेचने’ या ‘भीख मांगने’ या ‘पकौड़े तलने’ की बिना मांगी सलाह देते हैं!
डिग्रियां कागज के टुकड़े बन गई हैं: सालों की मेहनत और अपने माता-पिता के खून-पसीने की कमाई लगाकर पढ़ाई करने वाले युवाओं को जब ऐसी मामूली सलाह मिलती है, तो देश का भविष्य रो पड़ता है।
झूठे वादों की फैक्ट्री: जब चुनाव आते हैं, तो लाखों नौकरियों का वादा करने वाली पार्टियां सत्ता में आने के बाद युवाओं का वजूद भूल जाती हैं। पेपर लीक कांड हो या भर्ती घोटाले, युवाओं के भविष्य के साथ जो खेल खेला जा रहा है, वह अब बर्दाश्त के बाहर हो गया है।
समय आ गया है: जागो देश के युवाओं!
जब सोनम वांगचुक जैसा देशभक्त साइंटिस्ट सड़कों पर उतरता है, तो यह इस बात का संकेत है कि पानी अब सिर से ऊपर जा चुका है। 1. गांधीजी के रास्ते पर असहयोग आंदोलन: युवाओं को अब यह समझना होगा कि सिर्फ़ सोशल मीडिया पर कमेंट करने से बदलाव नहीं आएगा। युवाओं को धोखा देने वाले शासकों के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण लेकिन मज़बूत ‘असहयोग आंदोलन’ शुरू करना अब ज़रूरी हो गया है।
भ्रष्ट नीतियों का बहिष्कार: युवाओं को शिक्षा और रोज़गार जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरना होगा। अगर नेता लोगों के टैक्स के पैसे से ऐशो-आराम कर रहे हैं, तो उन्हें लोगों के सवालों का जवाब देना होगा।
नई उम्मीद: ‘सोनम वांगचुक को प्रधानमंत्री बनाओ’ की जनता की ज़ोरदार मांग!
आज देश का मिडिल क्लास और पढ़ा-लिखा युवा एक आवाज़ में कह रहा है कि अब हमें दूर की सोचने वाले और सही काम करने वाले लोग चाहिए, बकवास करने वाले नेता नहीं। सोनम वांगचुक एक ऐसे इंसान हैं जिन्होंने लद्दाख जैसे मुश्किल इलाके में ज़मीनी स्तर पर शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। देश को नेता नहीं, दूर की सोचने वाले की ज़रूरत है: अगर देश की बागडोर सोनम वांगचुक जैसे ईमानदार, टेक्नोक्रेट और ज़मीन से जुड़े संवेदनशील इंसान को सौंपी जाए, तो देश की दशा और दिशा दोनों बदल सकती है।
भ्रष्टाचार मुक्त भारत का विचार: सोनमजी जैसा निस्वार्थ देशवासी ही सही मायने में देश को गरीबी, बेरोज़गारी और अशिक्षा के अंधेरे से बाहर निकाल सकता है।
आखिरी लाइन:
अगर देश के युवा दिल्ली की सीमा पर बैठकर शिवाजी जैसे शांत लेकिन ज्वालामुखी जैसे महापुरुष के आंदोलन को देखते रहेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी। अब समय है – या तो जाग जाओ, या ज़िंदगी भर की गुलामी मान लो! सोनम वांगचुक के इस सत्याग्रह को देश के हर कोने से सपोर्ट मिलना चाहिए।

