गिर सोमनाथ : गिर सोमनाथ जिले से एक बहुत ही शर्मनाक और सनसनीखेज सवाल उठा है, जिसने गांधी के गुजरात में तथाकथित शराबबंदी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सवाल सुनकर पूरे सिस्टम के अधिकारी जो कानून-व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे करते हैं, उनकी बोलती बंद हो सकती है! सवाल यह है कि जिस जिले में पढ़-लिखकर देश का भविष्य बनाने निकले आम स्टूडेंट्स को उंगलियों पर पता है कि हर गली में देसी और विदेशी शराब कहां मिलेगी, उसी जिले की हाई-टेक पुलिस को ये अड्डे क्यों नहीं दिखते?
क्या यह गिर सोमनाथ जिला प्रशासन पूरी तरह फेल है, या पर्दे के पीछे चल रहा लाखों रुपये का ‘हप्ता राज’ है, जिसमें ऊपर से नीचे तक हर किसी से मुंह बंद रखने की कीमत वसूली जा रही है?
स्टूडेंट्स को ‘लोकेशन’ पता है, तो पुलिस अंधी और बहरी क्यों बनी हुई है?
आज गिर सोमनाथ जिले में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि शराबी और शराब तस्कर बेलगाम हो गए हैं।
बिना मुखबिर के भी शराब मिल जाती है: आम युवा और स्टूडेंट भी स्कूल-कॉलेज जाते समय जानते हैं कि कौन सी डेली, कौन सा नाका या कौन सी वाड़ी शराब बेचती है। लेकिन जब कानून के रखवाले उस रास्ते से गुजरते हैं, तो उन्हें सब कुछ ‘सब चंगा सी’ दिखता है!
पुलिस की परफॉर्मेंस पर सवाल: क्या पुलिस के मुखबिरों का नेटवर्क पूरी तरह बेकार हो गया है? या पुलिस खुद शराब तस्करों की ‘रक्षक’ बनी बैठी है? जब जनता सवाल पूछती है, तो खाकी वर्दी वाले तो छोटे-बड़े मोहरे पकड़कर ही खुश हो जाते हैं, लेकिन असली मगरमच्छ अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं।
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से सीधा सवाल: चाबुक कब बरसेगा?
यह गंभीर और चिंताजनक स्थिति अब गांधीनगर तक पहुंच गई है। गिर सोमनाथ के लोग अब CMO गुजरात और राज्य के होम मिनिस्टर हर्ष संघवी से तीखे सवाल पूछ रहे हैं:
- क्या गुजरात पुलिस सिर्फ़ आम लोगों से ट्रैफिक के नाम पर जुर्माना वसूलने में ही बिज़ी रहेगी? शराब तस्करों पर कब नज़र रखी जाएगी?
- गिर सोमनाथ में जो ज़बरदस्ती वसूली हो रही है, उसकी जांच किसी ईमानदार एजेंसी से क्यों नहीं कराई जा रही है?
- अगर युवा पीढ़ी शराब पीने की आदत में पड़ रही है, तो लोकल पुलिस इसे रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?
युवा पीढ़ी बर्बादी की राह पर: लोगों का गुस्सा
आज गिर सोमनाथ भ्रष्ट बाबुओं और शराब तस्करों की मिलीभगत से नशे की खाई में जा रहा है। लोकल लोग अब गुस्से में कह रहे हैं कि अगर पुलिस शराब की दुकानें बंद कराने में पूरी तरह नाकाम रही है, तो ज़िले में पुलिस चौकियां बनाने का क्या मतलब है? अब देखना यह है कि ‘पाक्को गुजरात न्यूज़’ की इस तीखी रिपोर्ट के बाद क्या होम डिपार्टमेंट जागेगा और गिर सोमनाथ पुलिस के खिलाफ एक्शन लेगा, या सिस्टम ऐसे ही सोता रहेगा, किश्तों की मलाई खाता रहेगा!

