सूरत : सूरत के बहुचर्चित नसीरनगर डिमोलिशन स्कैंडल में हर दिन नए अंकुर फूट रहे हैं, लेकिन इस बार जो धमाका हुआ है, उसने पूरे सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (SMC) और गांधीनगर तक के एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम में भूचाल ला दिया है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा बलि का बकरा बनाए गए और सस्पेंड किए गए एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने गुजरात हाई कोर्ट में एफिडेविट देकर सीधे कमिश्नर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इंजीनियर ने कोर्ट के सामने खुलासा किया है कि, “मैंने नसीरनगर का डिमोलिशन अपनी मर्ज़ी से नहीं किया, बल्कि म्युनिसिपल कमिश्नर ने मुझे ऑर्डर दिया था और अपना मैसेज भी मुझे फॉरवर्ड किया था!”
कमिश्नर के भेजे एक WhatsApp मैसेज की वजह से यह स्कैंडल भड़का
हाई कोर्ट में पेश डिटेल्स के मुताबिक, सस्पेंडेड ऑफिसर ने खुद को बचाने और सच सामने लाने के लिए कमिश्नर से मिले एक WhatsApp मैसेज का सबूत पेश किया है। कमिश्नर ने एक असरदार आदमी से मिला मैसेज इस इंजीनियर को फॉरवर्ड किया था, जिसमें नसीरनगर में तोड़फोड़ करने के साफ निर्देश थे। जैसे ही यह सबूत सामने आया, यह साबित हो गया कि इस पूरे खेल के असली मास्टरमाइंड बड़े अधिकारी थे, जिन्होंने प्यादों को सस्पेंड करके अपनी खाल बचाने की कोशिश की।
गरीबों का एशिया तबाह हो गया था, अब पाप का घड़ा फूट गया है!
नसीरनगर इलाके में इस तथाकथित कानूनी/गैर-कानूनी तोड़फोड़ के बाद हंगामा हुआ था। उस समय, विपक्ष और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि बिना किसी सही नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के रातों-रात बुलडोजर पलट दिया गया। जब मामला बढ़ा और कानूनी उलझनें पैदा हुईं, तो ऊपर बैठे ‘साहबों’ ने अंतरिम उपाय के तौर पर निचले लेवल के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड करने और पूरे मामले को दबाने की योजना बनाई। लेकिन, इस अन्याय के आगे झुकने के बजाय, सस्पेंड अधिकारी ने हाई कोर्ट की शरण ली है और अधिकारियों की पोल खोल दी है।
क्या कमिश्नर के खिलाफ भी कानूनी मुश्किलें आएंगी? हाई कोर्ट में इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद कानूनी हलकों और सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की लॉबी में ज़बरदस्त हंगामा मच गया है। सिस्टम, जो अब तक बचाव की मुद्रा में था, अब पूरी तरह से निशाने पर आ गया है। अगर कोर्ट इस एफिडेविट के सबूतों को मान लेता है, तो कमिश्नर और दूसरे बड़े अधिकारियों को हाई कोर्ट के कड़े सवालों का जवाब देना होगा। इतना ही नहीं, कमिश्नर पर अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करने और गलत तरीके से डेमोलिशन करवाने के आरोप में कड़ी रेड आई भी पड़ सकती है।
अब यह बहस भी ज़ोर पकड़ रही है कि कमिश्नर को वह पावरफुल मैसेज भेजने वाला ‘सुपर पावर’ कौन था? क्या इस डेमोलिशन के पीछे सूरत का कोई बड़ा नेता या बिल्डर लॉबी है? ‘महानगर मेट्रो ‘ इस पूरे मामले के लेटेस्ट अपडेट्स पर नज़र रखे हुए है। आने वाले दिनों में सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कई बड़े नामों पर गाज गिरे तो हैरानी नहीं होगी!

