खेड़ा : खेड़ा लोकसभा क्षेत्र के सांसद देवुसिंह चौहान ने महमूदाबाद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में समाज की सच्चाई को उजागर करते हुए एक चौंकाने वाला और बड़ा बयान दिया है। महमूदाबाद में टीबी-मुक्त अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में, सांसद ने सरकारी स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों का हवाला देते हुए ग्रामीण इलाकों में अभी भी फैली बाल विवाह की कुप्रथा और सोच पर कड़ा प्रहार किया। इस खुलासे के बाद पूरे खेड़ा जिले के सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
अकेले महमूदाबाद में 17 साल की उम्र की 18 लड़कियां गर्भवती: सरकारी सर्वेक्षण का खुलासा
कार्यक्रम में मौजूद लोगों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए सांसद देवुसिंह चौहान ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में फैली कुछ बुरी प्रथाओं, पुरानी मान्यताओं और अज्ञानता के कारण आज भी कम उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती है। इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार करते हुए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सर्वेक्षण के आंकड़े जारी किए।
सांसद द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अकेले महमूदाबाद इलाके में:
यह पता चला है कि 17 साल की कम उम्र में ही 18 लड़कियां गर्भवती हो गई हैं।
48 लड़कियां कानूनी उम्र 18 साल पूरी करने से पहले ही मां बन चुकी हैं।
कम उम्र में मां बनना: लड़कियों की सेहत के लिए बड़ा खतरा
देवुसिंह चौहान ने चिंता जताते हुए कहा कि यह कोई मामूली आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक बुराई का सबूत है। कम उम्र में शादी और उसके बाद गर्भावस्था के कारण इन लड़कियों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है, जिससे वे गंभीर एनीमिया (खून की कमी), टीबी और कुपोषण जैसी जानलेवा बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। यह कुप्रथा न केवल लड़की की सेहत, बल्कि अजन्मे बच्चे के भविष्य को भी अंधकार में डाल देती है।
समाज और प्रशासन में जागरूकता की अपील
सांसद के इस बयान ने सरकारी तंत्र और सामाजिक संगठनों के कामकाज पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि डिजिटल युग में भी इतनी बड़ी संख्या में बाल विवाह कैसे हो रहे हैं? देवूसिंह चौहान ने ग्रामीण समाज के नेताओं, परिवारों और प्रशासन से अपील की है कि वे इस बुरी प्रथा को खत्म करने और लड़कियों को शिक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाएं, और कम उम्र में शादी के बंधन में बांधकर उनकी सेहत से समझौता न करें।

