वरतकर नगर पुलिस और नेताओं की सांठगांठ का सनसनीखेज पर्दाफाश: ‘राजा ठाकुर’ के रसूख के आगे कमिश्नरेट लाचार? अवैध कमाई की आतंकी संगठनों और लव जिहाद में फंडिंग की आशंका; ‘महानगर मेट्रो’ की विशेष रिपोर्ट
ठाणे : एक तरफ जहां मुंबई से सटे ठाणे शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी शहर की छाती पर कानून-व्यवस्था की ऐसी धज्जियां उड़ रही हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। महाराष्ट्र विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और सदन के भीतर राज्य की सुरक्षा पर लंबी-चौड़ी चर्चाएं हो रही हैं। लेकिन सदन से महज कुछ किलोमीटर दूर, वरतकर नगर पुलिस स्टेशन की हद में जो खेल चल रहा है, उसने पूरे गृह विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
विश्वस्त सूत्रों और पड़ताल के आधार पर मिली बेहद सटीक और विस्फोटक जानकारी के मुताबिक, उपवन परिसर के ठीक पीछे और यीयूर चेक पोस्ट के पास स्थित एक बेहद सुरक्षित और आलीशान बंगले को अंतरराज्यीय ‘मिनी कसीनो’ में तब्दील कर दिया गया है। यहां कानून की कोई बिसात नहीं है। यहां सिर्फ दो ही चीजें चलती हैं—ताश के पत्ते और नोटों के बंडल!
अंतरराज्यीय सट्टेबाजों का अड्डा: चार्टर्ड गाड़ियों में आ रहे हैं रईस
यह कोई छोटा-मोटा स्थानीय जुए का अड्डा नहीं है, बल्कि कॉर्पोरेट शैली में चलने वाला एक इंटर-स्टेट सट्टा सिंडिकेट है। हमारे पास उपलब्ध पुख्ता जानकारी के मुताबिक, इस अड्डे पर रोजाना करोड़ों से लेकर अरबों रुपये की हार-जीत होती है।
आश्चर्य की बात यह है कि इस अड्डे पर दांव लगाने के लिए न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि गुजरात के हीरा बाजार के बड़े व्यापारी, राजस्थान के सट्टेबाज, हरियाणा के भू-माफिया और मुंबई, नासिक व जलगांव के रसूखदार सफेदपोश अपराधी और उद्योगपति शामिल हैं। इन वीआईपी जुआरियों की गाड़ियां जब रात के अंधेरे में यीयूर चेक पोस्ट पार करती हैं, तो वरतकर नगर पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ियां अक्सर अपना रास्ता बदल लेती हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम का कथित तौर पर इस्तेमाल होने के कारण पुलिस यहां छापेमारी करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रही है।
काले साम्राज्य के सिंडिकेट का ‘ओपन सीक्रेट’: कौन हैं ये चेहरे?
इस पूरे अवैध साम्राज्य का ढांचा बेहद शातिर और खतरनाक तरीके से तैयार किया गया है। इस सिंडिकेट को चलाने के पीछे कुछ ऐसे नाम हैं जिनका सिक्का ठाणे के अंडरवर्ल्ड और राजनीतिक हलकों में चलता है:
- राजा ठाकुर और जीतू जलगांव: ये इस काले धंधे के असली ‘किंगपिन’ और फाइनेंसर हैं। इस बंगले के अंदर इनका हुक्म ही आखिरी सच होता है।
- मंगेश भोसले और शेखर वडाला: इन लोगों को अड्डे की सुरक्षा, बाउंसर्स की तैनाती और बाहरी खतरों या ईमानदार अधिकारियों की रेड से बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- रफा (घोड़ी भूरिया) और गोपाल शर्मा (मैनेजर): गोपाल शर्मा इस क्लब का मुख्य रणनीतिकार और ‘कैशियर’ है। सूत्रों का दावा है कि गोपाल शर्मा का मुख्य काम सिर्फ जुआ खिलवाना नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन के बड़े साहबों तक हर महीने पहुंचने वाले करोड़ों रुपये के ‘हफ्ते’ (रिश्वत) की सेटिंग संभालना है।
सबसे सनसनीखेज राजनीतिक कनेक्शन: राजनीतिक हलकों में तैर रही खबरों और सूत्रों के दावों के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का मुख्य कर्ताधर्ता ‘राजा ठाकुर’ खुद को राज्य के शीर्ष नेतृत्व (उपमुख्यमंत्री स्तर के नेताओं) का बेहद करीबी और ‘राइट हैंड’ बताता है। इसी राजनीतिक कवच का इस्तेमाल करके उसने पूरे
ठाणे पुलिस तंत्र को अपनी उंगलियों पर नचा रखा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने बड़ा खतरा: जुए के पैसे से देश विरोधी खेल!
जब इस मामले की गहराई तक जाने का प्रयास किया गया, तो एक ऐसा भयानक पहलू सामने आया जो सिर्फ जुए या सट्टे तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे देश की आंतरिक सुरक्षा पर प्रहार करता है।
विस्फोटक जानकारी: सूत्रों से पता चला है कि इस जुए के अड्डे से होने वाली काली कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा मैनेजर रफा और भूरिया के माध्यम से आसपास के गरीब और आदिवासी इलाकों में अवैध धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) और ‘लव जिहाद’ के नेटवर्क को फंड करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, रफा और भूरिया के तार कुछ देश विरोधी और आतंकवादी संगठनों से भी जुड़े होने की आशंका सामने आई है। जुए के इस गंदे पैसे का इस्तेमाल देश के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने के लिए हो रहा है।
खाकी पर दाग: सीनियर पीआई ‘माने’ और उच्च अधिकारियों की भूमिका
सवाल यह नहीं है कि यह अड्डा चल रहा है, सवाल यह है कि यह किसकी शह पर चल रहा है? वरतकर नगर पुलिस स्टेशन के सीनियर पीआई माने की नाक के नीचे, उनके कार्यक्षेत्र में आने वाली यीयूर चेक पोस्ट के पास इतनी बड़ी अवैध गतिविधि हो रही हो और उन्हें भनक न हो, यह नामुमकिन है। सूत्रों का सीधा आरोप है कि वरतकर नगर पुलिस के इस थाने में रोजाना और साप्ताहिक आधार पर नोटों से भरे बैग पहुंचाए जाते हैं।
न सिर्फ स्थानीय पुलिस, बल्कि ठाणे पुलिस कमिश्नर से लेकर डीसीपी (DCP) स्तर तक के अधिकारियों को इस अड्डे की बारीक से बारीक जानकारी लिखित रूप में दी जा चुकी है। लेकिन जब पैसा बोलता है, तो खाकी का ईमान खामोश हो जाता है। पुलिस तंत्र की यह चुप्पी साबित करती है कि यह सिस्टम अपराधियों के आगे घुटने टेक चुका है।
‘महानगर मेट्रो’ के सीधे और तीखे सवाल:
- क्या मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को इस अड्डे की गुप्त जानकारी और शिकायतें मिलने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि सत्ता के गलियारों तक इस जुए के पैसे की हिस्सेदारी पहुंच रही है?
- ठाणे पुलिस कमिश्नर महोदय, क्या आपकी अगुवाई में ठाणे के भीतर कानून का नहीं बल्कि ‘राजा ठाकुर’ और उसके गुर्गों का सिक्का चलेगा?
- अपनी हद में देश का सबसे बड़ा जुआ सिंडिकेट और देश विरोधी गतिविधियां चलाने देने वाले सीनियर पीआई माने को तत्काल सस्पेंड करके उनकी आय से अधिक संपत्ति की जांच एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा क्यों नहीं की जा रही है?
हमारा संकल्प:
‘महानगर मेट्रो’ इस रिपोर्ट को सिर्फ एक पन्ने पर छापकर शांत नहीं बैठेगा। जब तक यीयूर की खूबसूरत पहाड़ियों को कलंकित करने वाला यह आलीशान बंगला सील नहीं होता और इसके पीछे बैठे सफेदपोश मगरमच्छ जेल की सलाखों के पीछे नहीं जाते, तब तक हमारा यह खोजी अभियान जारी रहेगा।

