पाटन ज़िले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जो पिता-पुत्र के पवित्र रिश्ते को तार-तार कर रही है और इंसानियत को शर्मसार कर रही है। जहाँ एक तरफ पिता अपने बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी ज़िंदगी लगा देता है, वहीं दूसरी तरफ पाटन में एक निकम्मे बेटे ने अपने बूढ़े पिता पर जानलेवा हमला कर दिया। ‘नौकरी कर लो’ जैसी मामूली बात पर भड़के इस कलयुगी बेटे द्वारा अपने ही पिता को चाकू मारने की दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
पिता की सलाह बेटे को ज़हर जैसी लगी: घर में हुआ खूनी खेल
मिली जानकारी के अनुसार, पाटन शहर में रहने वाले इस परिवार में बूढ़े पिता अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित थे क्योंकि बेटा कोई काम नहीं कर रहा था। आज पिता ने हमेशा की तरह प्यार से बेटे को समझाया और कहा, “अब तुम बड़े हो गए हो, कोई नौकरी करो और घर की ज़िम्मेदारी उठाओ।” बस, पिता की ये बातें सुनते ही कलयुगी बेटे का पारा चढ़ गया। उसने घर में पड़ा एक तेज़ चाकू उठाया और बिना कुछ सोचे-समझे अपने ही बूढ़े पिता पर हमला कर दिया, जिन्होंने उसे पाला-पोसा था।
खून से लथपथ हालत में पिता को अस्पताल ले जाया गया: इलाके में हड़कंप
इस हिंसक हमले में बेटे ने पिता के शरीर पर कई बार चाकू से वार किए, जिससे बूढ़ा पिता खून से लथपथ होकर ज़मीन पर गिर पड़ा। घर में चीख-पुकार सुनकर आस-पास के लोग मौके पर दौड़े और खून से लथपथ पिता को तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। दूसरी ओर, खबर मिल रही है कि घटना को अंजाम देने के बाद बिगड़ैल बेटा फरार हो गया है।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ की ग्राउंड रिपोर्ट:
नैतिक मूल्यों का पतन: क्या उस पिता के खिलाफ चाकू उठाते समय इस कलयुगी बेटे का हाथ नहीं काँपा, जिसकी उंगली पकड़कर उसने चलना सीखा था? यह विकृत मानसिकता समाज के लिए चिंता का विषय है।
पुलिस हरकत में: घटना की सूचना मिलते ही पाटन पुलिस की एक टीम अस्पताल और घटनास्थल पर पहुँची। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और उस बिगड़ैल बेटे को पकड़ने की कोशिश कर रही है जो फरार हो गया है।
लोगों का गुस्सा: पाटन में जैसे ही इस बेरहम घटना की खबर तेज़ी से फैली, लोगों में उस बिगड़ैल बेटे के प्रति भारी आक्रोश और निंदा की भावना पैदा हो गई है और मांग की जा रही है कि उसे कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए।
अब यह देखना बाकी है कि पाटन पुलिस इस ‘कलयुगी’ बेटे को कब सलाखों के पीछे भेजती है। लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि आज के कुछ युवाओं में सहनशक्ति और नैतिक मूल्यों का स्तर कितना गिर गया है।

