लखनऊ में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्यों से उत्तर प्रदेश के अधिकारी,कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने मुलाकात की। पेंशनर संगठनों ने 65 साल की उम्र पूरी होने पर अतिरिक्त पेंशन दिए जाने की मांग की।
लखनऊ: न्यूनतम बेसिक वेतन 18 हजार रुपये ने बढ़ाकर 69 हजार रुपये किया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि सातवें वेतन आयोग के लागू होने के समय देश की प्रति व्यक्ति आय 92,294 रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 2.20 लाख रुपये हो चुकी है और ऐसे में वेतन और पेंशन का पुनरीक्षण भी इसी अनुपात में किया जाना चाहिए। लखनऊ में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्यों से मुलाकात के दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संगठनों ने की।
केंद्रीय वेतन आयोग के सदस्य पंकज जैन की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय दल ने अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनरों के संगठनों से सुझाव लिए। अपर मुख्य सचिव (वित्त) दीपक कुमार ने उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति और पिछले 10 सालों में आय-व्यय से जुड़ा ब्यौरा पेश किया। बैठक में आयोग के समक्ष आईएएस, आईपीएस और आईएफएस एसोसिएशनों सहित कई कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें रखीं।
65 साल की उम्र में मिले पांच प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन
उत्तर प्रदेश की ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन की इकाई के चेयरमैन प्रमोद कुमार वर्मा ने आयोग से कहा कि, प्रति व्यक्ति आय में हुई बढ़ोतरी के अनुरूप ही वेतन पुनरीक्षण होना चाहिए। उन्होंने 3.15 फिटमेंट फैक्टर का सुझाव भी दिया। पेंशनर संगठनों ने 65 साल की उम्र पूरी होने पर पांच प्रतिशत, 70 साल की उम्र होने पर 10 प्रतिशत और 75 साल की आयु पूरी होने पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन देने की मांग रखी। उन्होंने पेंशन कम्यूटेशन की 15 साल की कटौती अवधि कम करने और रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों और पेंशनरों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।
पेंशन के पुनरीक्षण का हो स्पष्ट फॉर्मूला
पेंशनर संगठनों ने आयुष्मान योजना जैसी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ देने का सुझाव दिया। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने, मकान किराया भत्ता, रिस्क पे, वार्षिक बोनस और सेवानिवृत्ति के लाभों में सुधार के मुद्दे भी उठाए। उन्होंने पुराने पेंशनरों की पेंशन के पुनरीक्षण का स्पष्ट फॉर्मूला निर्धारित करने की भी मांग की।
संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति ने पेंशन के कम्यूटेशन की अवधि कम करने की मांग की। समिति ने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में पेंशन का 40 प्रतिशत हिस्सा काटा जाता है, जबकि आठ फीसदी ब्याज के साथ इसकी रिकवरी करीब 10 साल 11 माह में पूरी हो जाती है। इसके बावजूद 15 साल तक कटौती का सिलसिला जारी रहता है।
उच्च स्तर पर भी हो पर्याप्त वेतन वृद्धि
कर्मचारी संगठनों ने आयोग से कहा कि वरिष्ठ पदों पर वेतन वृद्धि सीमित रह जाती है जबकि जिम्मेदारियां निरंतर बढ़ती जाती हैं। उन्होंने कहा कि, वेतन संरचना में बदलाव करके उच्च स्तरों पर भी पर्याप्त वेतन वृद्धि सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं, ग्रेच्युटी, हाउस बिल्डिंग एडवांस, भत्तों और पेंशन कम्यूटेशन के नियमों में संशोधन करने की मांग उठाई।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आयोग से कहा कि वेतन बढ़ने से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। इससे बाजार में मांग बढ़ेगी और जीएसटी व आयकर संग्रहण में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा बचत योजनाओं के माध्यम से सरकार को पूंजीगत निवेश मिलेगा। वेतन आयोग का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

