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‘कहां चला गया मेरा कीमती हार?’ राम मंदिर चंदा चोरी विवाद में श्रद्धालु के दावे ने मचाई हलचल

कर्नाटक में रहने वाले एक श्रद्धालु का दावा है कि उसने राम मंदिर में कीमती हार चढ़ाया था। आज तक उसे इसकी रसीद नहीं मिली है।

अयोध्‍या: यूपी का अयोध्या इस समय किसी कार्यक्रम या पूजा को लेकर नहीं बल्कि आस्था में सेंध लगाने को लेकर सुर्खियों में है। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। लगातार एसआईटी जांच चल रही है। इस बीच, सोशल मीडिया पर कर्नाटक में रहने वाले एक श्रद्धालु ने दावा किया कि उसने राम मंदिर में कीमती हार दान किया था लेकिन आज तक उसके इसकी रसीद मिली। पता ही नहीं चला कि हार का क्‍या किया गया। इसी तरह के कई और यूजर्स ने दावा किया है।

सूत्रों के अनुसार, जांच में कई नए पहलू सामने आए हैं, जिनमें नकदी के साथ-साथ सोने, चांदी और हीरे के दान किए गए गहनों के रिकॉर्ड की भी गहराई से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि दान में मिले बहुमूल्य आभूषणों के प्रबंधन और रिकॉर्ड में भी अनियमितताएं हो सकती हैं।
चंपत राय और गोपाल राव से चली पूछताछ

राम मंदिर के ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा, महासचिव चंपत राय और उनके ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव तथा गोपाल राव से पूछताछ की गई। इस दौरान एसआईटी ने कई सबूत जुटाए हैं। बताया जा रहा है कि टिन्नू यादव से जब दोबारा पूछताछ की तो गिनती प्रक्रिया में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम लिया है। एसआईटी ने गुरुवार देर रात तक कई लोगों से पूछताछ कर अहम सबूत जुटाए। इसी क्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा से करीब तीन घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। इसके अलावा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और गोपाल राव से भी फिर पूछताछ की गई। जांच टीम कथित तौर पर दानराशि की गणना, रिकॉर्ड और उससे जुड़े प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जांच कर रही है।

कई खामियां जांच टीम के सामने आईं

सूत्रों का दावा है कि नकदी के रिकॉर्ड में कई खामियां जांच टीम के सामने आई हैं। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि गोपाल राव ट्रस्ट में किसी आधिकारिक पद पर नहीं होने के बावजूद कथित रूप से वीवीआईपी दर्शन पास जारी करने के अधिकार का उपयोग करते रहे। उनकी आईडी का इस्तेमाल कर एक रिश्तेदार द्वारा भी वीवीआईपी पास जारी किए जाने की जांच की जा रही है। इसके अलावा मंदिर प्रबंधन, दानराशि की गणना और मंदिर निर्माण कार्यों में उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

पत्‍थरों की खरीद प्रक्रिया में गोपाल राव की भूमिका

सूत्रों का कहना है कि मंदिर निर्माण के दौरान निर्माण सामग्री और पत्थरों की खरीद प्रक्रिया में भी गोपाल राव की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसकी जानकारी अब जांच के दायरे में लाई जा रही है। हालांकि, अब तक एसआईटी या जिला प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

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