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नागौद राजघराना गोलीकांड में नया मोड़, बाबा राजा बोले- ‘सुनीता मेरी प्रेमिका नहीं, वर्किंग पार्टनर है’

मध्यप्रदेश के सतना के चर्चित नागौद राजघराना गोलीकांड में नया मोड़ आ गया है; घटना के 4 दिन बाद मुख्य आरोपी रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा ने मीडिया के सामने आकर सुनीता सिंह को प्रेमिका बताने वाले दावों को खारिज करते हुए इसे आत्मरक्षा का मामला बताया है।

नागौद राजघराना गोलीकांड में नया मोड़

सतना जिले में स्थित नागौद राजघराने की परसमनिया गढ़ी में 11 जून को हुए सनसनीखेज गोलीकांड में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। घटना के बाद से सुर्खियों में रहे रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा ने चार दिनों के बाद पहली बार मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने उन तमाम चर्चाओं और दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें घायल महिला सुनीता सिंह को उनकी दूसरी पत्नी या प्रेमिका बताया जा रहा था। रूपेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि सुनीता केवल उनकी बिजनेस पार्टनर और पेट्रोल पंप की मैनेजर हैं।

‘डिफेंस में चली गोली, दीवार से टकराकर पत्नी को लगी’

बाबा राजा ने घटना के वक्त का ब्योरा देते हुए आरोप लगाया कि उनकी पत्नी योगिता सिंह, साले नागेंद्र सिंह राठौर और अन्य ससुराल वालों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की थी। दोपहर करीब 3:30 बजे हुए इस विवाद में उन्हें धक्का देकर गिराया गया, जिससे उनका चश्मा टूट गया और वे घायल हो गए। उन्होंने दावा किया कि जब हमलावर उन पर हावी हो रहे थे, तब सुनीता सिंह ने अपनी आत्मरक्षा में दीवार की तरफ हवाई फायरिंग की थी। वह गोली दीवार से टकराकर सीधे योगिता सिंह को जा लगी। उनका इरादा किसी को जान से मारने का नहीं था।

संपत्ति विवाद और क्रॉस एफआईआर

इस पूरे मामले के पीछे वैवाहिक और संपत्ति विवाद को मुख्य वजह बताया जा रहा है। रूपेंद्र सिंह के अनुसार, उन्होंने अपने रिश्ते को बचाने के लिए पहले ही कोर्ट में धारा 9 तहत केस दायर कर रखा था, लेकिन ससुराल पक्ष की नजर उनकी पैतृक संपत्ति पर है। फिलहाल, उचेहरा थाना पुलिस ने बाबा राजा की शिकायत पर साले नागेंद्र सिंह सहित तीन लोगों के खिलाफ मारपीट और धमकी की धाराओं में क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली है। फायरिंग करने वाली आरोपी सुनीता परिहार पहले ही पुलिस की गिरफ्त में है और अब मामले की असल सच्चाई फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी।

क्या होती है हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9?

कानूनी जानकारों के अनुसार, जब पति या पत्नी में से कोई भी बिना किसी वाजिब कारण के एक-दूसरे से अलग रहने लगता है, तो पीड़ित पक्ष अदालत में ‘दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना’ के लिए धारा 9 के तहत याचिका लगा सकता है। अदालत दोनों पक्षों को सुनकर साथ रहने का आदेश दे सकती है। इस मामले में बाबा राजा इसी आधार पर खुद को बेकसूर बता रहे हैं।

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