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एमपी में कब आएगा मानसून? मौसम विभाग के सैटेलाइट नहीं, इस पक्षी के अंडे बताते हैं कब और कितनी होगी बारिश

जहां एक तरफ देश आधुनिक सैटेलाइट और आईएमडी के वेदर मॉडल्स पर निर्भर है, वहीं मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में किसान आज भी टिटहरी पक्षी के अंडों और उसके घोंसले की जगह से सटीक मानसून का अनुमान लगा रहे हैं।

एमपी में कब आएगा मानसून?

भोपाल: मुंबई में मानसून की रफ्तार धीमी है और दिल्ली बदलते मौसम से जूझ रही है। देश का एक बड़ा हिस्सा आज मौसम ऐप और मौसम विज्ञान विभाग के बुलेटिन खंगाल रहा है। लेकिन मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के गांवों में कहानी बिल्कुल अलग है। यहां के किसान आसमान के बजाय जमीन की ओर देख रहे हैं, जहां टिटहरी नाम का एक छोटा सा पक्षी सदियों पुरानी परंपरा के साथ मानसून की भविष्यवाणी कर रहा है।

टिटहरी के 4 अंडे और मानसून के 4 महीने

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, टिटहरी के अंडे आगामी मानसून की तीव्रता और पैटर्न का सटीक संकेत देते हैं। यह पक्षी आमतौर पर चार अंडे देता है, जिन्हें ग्रामीण बुजुर्ग मानसून के चार महीनों से जोड़कर देखते हैं। हर एक अंडे की स्थिति यह तय करती है कि उस विशेष महीने में कितनी बारिश होगी।

विंध्य के किसान अंशुमन सिंह बताते हैं कि यह कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से सहेजा गया पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान है। पूर्वजों ने लंबे समय तक पशु-पक्षियों के व्यवहार को करीब से देखकर इस विज्ञान को विकसित किया है।

हमारे दादा-परदादा ने कभी वेदर ऐप नहीं देखा। उन्होंने हमें सिखाया कि जब प्रकृति खुद संकेत दे रही हो, तो उसे पढ़ना सीखो। टिटहरी का अंडा अगर नुकीला है, तो समझो उस महीने बादलों की मेहरबानी जमकर होगी। यह प्रकृति और किसान के बीच का पुराना संवाद है। अंशुमन सिंह, किसान (सतना, मध्य प्रदेश)

घोंसले की ऊंचाई से तय होती है बाढ़

अंडों के अलावा टिटहरी किस जगह को चुन रही है, यह सबसे महत्वपूर्ण है। अगर टिटहरी किसी ऊंचे बांध या ऊंचे स्थान पर अंडे देती है, तो ग्रामीण इसे भारी बारिश और बाढ़ का संकेत मानते हैं। माना जाता है कि पक्षी को प्राकृतिक रूप से पानी बढ़ने का अहसास हो जाता है और वह अंडों को सुरक्षित रखने के लिए ऊंचाई चुनती है। इसके विपरीत, निचले इलाकों में अंडे देने का मतलब कमजोर मानसून माना जाता है।

ऊंचाई या ऊंचे बांध पर अंडे देना अत्यधिक भारी बारिश और बाढ़ की संभावना अंडों को बढ़ते जलस्तर से बचाने की प्राकृतिक प्रवृत्ति।
निचले या समतल मैदान में अंडे देना सामान्य या औसत से कम बारिश (सूखा) जलभराव का खतरा न होने के कारण सुरक्षा की चिंता कम।
अंडों का नुकीला सिरा नीचे होना उस महीने में मूसलाधार और लगातार बारिश मानसून की तीव्रता और हवाओं के अनुकूल दबाव का संकेत।
कुल 4 अंडे देना मानसून के चारों महीनों में क्रमिक वर्षा प्रत्येक अंडा जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर का प्रतिनिधित्व करता है।

आकार और दिशा का रहस्य

टिटहरी के अंडों का नुकीला सिरा अगर नीचे की ओर हो, तो मूसलाधार बारिश की संभावना बढ़ जाती है। अंडों की दिशा से हवाओं के रुख और मानसून के आने के रास्ते का भी अनुमान लगाया जाता है। सतना, रीवा, सीधी, सिंगौली और पन्ना के खुले खेतों और नदियों के किनारे पाए जाने वाले ये पक्षी पारंपरिक खेती का आज भी एक अहम हिस्सा बने हुए हैं।

हालांकि आधुनिक मौसम विज्ञान इन दावों की पुष्टि नहीं करता और वैज्ञानिक सैटेलाइट डेटा को ही सटीक मानते हैं, लेकिन बदलते क्लाइमेट चेंज के दौर में वैज्ञानिकों के लिए भी यह पारंपरिक ज्ञान अध्ययन का एक दिलचस्प विषय बना हुआ है।

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