सरकारी ड्यूटी छोड़ निजी ऑफिस में बैठने के आरोप, पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल
अवैध शराब कारोबार और वसूली तंत्र को लेकर पुलिस महकमे पर उठे गंभीर सवाल
पवन माकन : अहमदाबाद। अहमदाबाद पुलिस महकमे की साख पर बट्टा लगाने वाला और कानून-व्यवस्था को ठेंगे पर रखने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर में ‘वहीवटदार’ (अवैध वसूली करने वाले) के रूप में जिसका नाम तेजी से गूंज रहा है, वह ‘गिरी’ किसी निजी कंपनी में काम नहीं करता, बल्कि खुद पुलिस विभाग का एक आधिकारिक कर्मचारी है! सबसे हैरान और शर्मसार करने वाली बात यह है कि खाकी वर्दी की तनख्वाह लेने वाला यह सरकारी मुलाजिम थाने में ड्यूटी करने के बजाय वाडज पुलिस चौकी के पास स्थित एक गुप्त निजी दफ्तर में डेरा जमाए बैठा रहता है। यहीं से वह पूरे शहर के बूटलेगरों (शराब माफियाओं) और अपराधियों के साथ रोजाना लाखों रुपये का काला कारोबार खुलेआम संभालता है।
गुलबाई टेकड़ा में मौत का सामान: केमिकल युक्त शराब और स्पा की आड़ में ‘पाप नगरी’!
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, पुलिस महकमे के इस कथित वसूलीबाज के संरक्षण के चलते गुलबाई टेकड़ा इलाका अपराध का गढ़ बन चुका है:
केमिकल युक्त जहरीली देसी शराब: इस इलाके में बिकने वाली देसी शराब साधारण नहीं, बल्कि बेहद खतरनाक केमिकल से तैयार की जाती है। यह कभी भी बड़े ‘लठ्ठाकांड’ (जहरीली शराब कांड) को अंजाम देकर बेकसूर नागरिकों की जान ले सकती है।
विदेशी शराब की अवैध कटिंग: इस कथित कर्मचारी की सीधी सांठगांठ से विदेशी शराब के बड़े जत्थों और कंटेनरों की कटिंग (अवैध अनलोडिंग) यहां रातों-रात की जाती है।
स्पा की आड़ में जिस्मफरोशी: हेल्थ और वेलनेस स्पा के बोर्ड टांगकर अंदर खुलेआम हाई-प्रोफाइल देह व्यापार का धंधा फल-फूल रहा है।
बड़ा सवाल: क्या स्थानीय थाना प्रभारी (PI) को जनता की परेशानियों को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं है? क्या वे केवल समय पर पहुंचने वाले ‘मोटे हिस्से’ (कमीशन) की उगाही में ही मस्त हैं?
सिस्टम के आका खामोश: PCB, क्राइम ब्रांच और DCP स्क्वाड क्यों लाचार?
पुलिस विभाग का एक छोटा सा कर्मचारी सरकारी दफ्तर छोड़कर निजी ऑफिस से इतना बड़ा नेटवर्क चलाए, यह किसी बड़े सियासी या प्रशासनिक वरदहस्त के बिना मुमकिन नहीं है। गलियारों में चर्चा तो यहां तक है कि गिरी पर एसपी (SP) रैंक के शीर्ष अधिकारियों और पुलिस विभाग के बड़े चेहरों का सीधा हाथ है। यही वजह है कि स्टेट मॉनिटरिंग सेल, पीसीबी (PCB), क्राइम ब्रांच या डीसीपी (DCP) स्क्वाड जैसी बड़ी एजेंसियां भी इन ठिकानों पर छापेमारी करने से कतराती हैं। इस वसूलीबाज का नेटवर्क इतना मजबूत है कि वह नीचे से लेकर ऊपर तक नियमित रूप से ‘कमीशन’ पहुंचा देता है।
करोड़ों के आलीशान बंगले और लग्जरी गाड़ियां: खाकी की तनख्वाह में इतनी दौलत कहां से आई?
सालों से विवादों में रहे इस पुलिस कर्मचारी गिरी की अचल संपत्ति देखकर बड़े-बड़े अफसर भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। पुलिस महकमे की सरकारी सैलरी पर निर्भर रहने वाले इस शख्स के पास आज करोड़ों रुपये के बंगले, आलीशान लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों की बेनामी जमीन का साम्राज्य कहां से आया? यह वाडज के उस प्राइवेट दफ्तर में होने वाली काली कमाई का जीता-जागता सबूत है।
थाना प्रभारी बावा ने अलापा ‘अंजान’ होने का राग!
जब इस पूरे काले कारनामे और गिरी के वसूली साम्राज्य को लेकर ‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ द्वारा स्थानीय थाना प्रभारी (PI) बावा से फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह पल्ला झाड़ते हुए खुद को अंजान बताया। उन्होंने कहा, “इस मामले में मुझे कोई जानकारी नहीं है और इलाके में चल रहे शराब या जुए के अवैध धंधों की बात भी मेरे संज्ञान में नहीं है।” अब सवाल यह उठता है कि जब पूरे इलाके में इतना बड़ा रैकेट चल रहा है, तो थाना प्रभारी इससे बेखबर कैसे रह सकते हैं?
‘महानगर मेट्रो’ का गृह विभाग और उप-मुख्यमंत्री को खुला चैलेंज
क्या राज्य के उप-मुख्यमंत्री और गृह मंत्रालय पुलिस महकमे के इस काली भेड़ के खिलाफ कोई सख्त कानूनी या विभागीय कार्रवाई करेंगे, जो खाकी की आड़ में अपराधियों से लाखों के सौदे कर रहा है? या फिर सिस्टम के आका इस खेल को यूं ही चलने देंगे? अगर इस केमिकल युक्त शराब से शहर में कोई बड़ी त्रासदी होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा? जनता अब इस काले चेहरे के खिलाफ सख्त एक्शन का इंतजार कर रही है।

