लांघणज, नंदासन, कड़ी और सांथल क्षेत्रों में अवैध शराब व जुए के कारोबार को संरक्षण देने के आरोप; अंतरराज्यीय नेटवर्क की चर्चा से मचा हड़कंप
पवन माकन : महेसाणा। गुजरात में शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता और कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महेसाणा जिले से सामने आई चर्चाओं और आरोपों ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला खड़ा किया है। जिले में अवैध शराब और जुए के कारोबार को लेकर उठ रहे आरोपों के बीच एक पुलिस कर्मचारी का नाम चर्चा के केंद्र में है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि महेसाणा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध शराब और जुए के अड्डे कथित रूप से बेखौफ होकर संचालित हो रहे हैं। आरोपों के अनुसार, इन गतिविधियों के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो कथित रूप से अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के बीच समन्वय स्थापित करता है। सूत्रों के अनुसार, लांघणज, नंदासन, कड़ी, बावलु और सांथल क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध गतिविधियों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई स्थानों पर शराब और जुए के अड्डे खुलेआम संचालित
होने की चर्चाएं हैं, लेकिन इनके विरुद्ध अपेक्षित स्तर की कार्रवाई नहीं हो रही।
चर्चाओं के केंद्र में आए पुलिस कर्मचारी तरुणसिंह डाभी पर आरोप है कि वह कथित रूप से विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय अवैध कारोबारियों के बीच प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और न ही किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि की गई है। मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब स्थानीय स्तर पर अंतरराज्यीय शराब तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि राजस्थान सीमा से शराब की खेप गुजरात में पहुंचाई जाती है और बाद में विभिन्न स्थानों पर सप्लाई की जाती है। हालांकि इन दावों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच का विषय है। उनका मानना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी यह मांग उठने लगी है कि गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय तथा संबंधित जांच एजेंसियां मामले का संज्ञान लेकर तथ्यों की जांच करें। यदि किसी भी स्तर पर अवैध गतिविधियों को संरक्षण दिए जाने या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल इन आरोपों को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इन गंभीर आरोपों की जांच कर सच्चाई को सामने लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

