अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज ने वीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर महासभा ने देश भर में सावरकर जयंती को ‘राष्ट्रवादी चेतना दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया। स्वामी चक्रपाणि ने वीर सावरकर को हिंदुत्व की राष्ट्रीय चेतना का महान प्रवर्तक बताते हुए भारत सरकार से उन्हें “भारत रत्न” देने की पुरजोर मांग की।
सावरकर के विचारों से बदल रही देश की राजनीति
स्वामी चक्रपाणि महाराज ने कहा कि वीर सावरकर का दिया हुआ ऐतिहासिक सूत्र—“राजनीति का हिंदूकरण और हिंदुओं का सैनिकीकरण”—आज के दौर में साकार होता दिख रहा है।
राजनीति का बदला रुख: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की विचारधारा को देश भर में व्यापक स्वीकार्यता मिली है। आज पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी हिंदुत्व की चेतना तेजी से बढ़ी है।
सैनिकीकरण की आवश्यकता: उन्होंने जोर देकर कहा कि अब सावरकर के दूसरे सूत्र ‘हिंदुओं का सैनिकीकरण’ को पूर्ण रूप से लागू करने का समय आ गया है। देश के प्रत्येक हिंदू युवक-युवती को आत्मरक्षा, अनुशासन और राष्ट्ररक्षा का सैन्य प्रशिक्षण मिलना चाहिए।
हिंदू महासभा और सावरकर का ऐतिहासिक संबंध
विज्ञप्ति में संगठन के इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया गया कि:
अखिल भारत हिंदू महासभा की स्थापना वर्ष 1915 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा की गई थी।
वीर सावरकर वर्ष 1937 से 1943 तक महासभा के 15वें राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे।
स्वामी चक्रपाणि महाराज खुद वर्ष 2006 से संगठन के 30वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में इस राष्ट्रवादी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
“वीर सावरकर को भारत रत्न देना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के गौरव, बलिदान और राष्ट्रवाद की विचारधारा का सम्मान होगा।”
स्वामी चक्रपाणि महाराज, राष्ट्रीय अध्यक्ष (अखिल भारत हिंदू महासभा)

