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Investigative report : अंकलेश्वर में ‘खाकी’ का खौफ खत्म? सरगम शॉपिंग के पीछे महिला बुटलेगरों का जुआघर और केमिकल युक्त जहरीली शराब का काला कारोबार!

सनसनीखेज आरोप: कथित किंगपिन ‘दत्तू’ के नाम पर वसूला जा रहा लाखों का हफ्ता; क्या बड़े लट्ठाकांड (शराब त्रासदी) के बाद जागेगा प्रशासन?
अंकलेश्वर। गुजरात में कागजों पर लागू शराबबंदी और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाता एक बेहद चौंकाने वाला और जानलेवा मामला भरूच जिले के अंकलेश्वर से सामने आया है। अंकलेश्वर ‘ए’ डिवीजन पुलिस स्टेशन के ठीक नाक के नीचे, सरगम शॉपिंग सेंटर के पीछे झुग्गी-झोपड़ियों की आड़ में कानून का सरेआम मखौल उड़ाया जा रहा है।

विश्वस्त सूत्रों से मिली सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, इस इलाके में भारती और ज्योति नाम की दो महिला बुटलेगर बिना किसी डर के सरेआम ‘तीन पत्ती’, ‘वरली मटका’ और ‘चकली-पोपट’ जैसे जुए के अड्डे धड़ल्ले से चला रही हैं। सितम तो यह है कि इसी इलाके में रमेश वसावा नाम का एक अन्य बुटलेगर देसी शराब की भट्टियां धकाकर मौत का काला कारोबार चला रहा है।

मुनाफे का लालच या मौत का सामान? केमिकल युक्त ‘जहर’ की बिक्री से बड़े लट्ठाकांड की आशंका!

सबसे गंभीर और रोंगटे खड़े कर देने वाली बात यह है कि बुटलेगर रमेश वसावा इन भट्टियों में खुद ही देसी शराब का जत्था तैयार करता है।

खोजी कड़ियां बताती हैं कि

अधिक मुनाफा कमाने और शराब को ज्यादा नशीला बनाने की अंधी हवस में इस देसी शराब में बेहद खतरनाक और जानलेवा केमिकल्स मिलाए जा रहे हैं। ताकि नशेड़ियों को तगड़ा नशा हो और वे मुंहमांगी कीमत दें।

बेहद गंभीर सवाल यह है कि यदि इस केमिकल युक्त जहरीली शराब को पीने से अंकलेश्वर में कोई बड़ी शराब त्रासदी (लट्ठाकांड) होती है और बेगुनाह लोग अपनी जान गंवाते हैं, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या स्थानीय पुलिस किसी बड़ी अनहोनी और लाशों के ढेर का इंतजार कर रही है?

कथित किंगपिन ‘दत्तू’ का आतंक: रोजाना लाखों की हफ्ता वसूली का खेल!

अंदरूनी सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, इस पूरे इलाके में लगभग 30 से 40 अवैध धंधे और ठिकाने बिना किसी रोक-टोक के सीना तानकर चल रहे हैं। इस पूरे काले साम्राज्य को खाकी और कानून से ‘अभयदान’ दिलाने के लिए ‘दत्तू’ नाम का एक कथित किंगपिन (वहीवटदार) सक्रिय है।
चर्चाओं का बाजार गर्म है कि यह कथित बिचौलिया ‘दत्तू’ रोज के लाखों रुपये का हफ्ता वसूल कर ऊपर तक पहुंचाता है। इसी हफ्ताखोरी के दम पर बुटलेगर और जुआ माफिया पुलिस को अपनी जेब में रखने का दंभ भरते हुए सरेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं।

SP, LCB और SMC मौन क्यों? जनता में भारी आक्रोश

विभाग शिकायत की स्थिति कार्रवाई का नतीजा

अंकलेश्वर ‘ए’ डिवीजन बार-बार लिखित/मौखिक शिकायत शून्य (मूकदर्शक)
लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) पी.आई. को लगातार दी गई सूचना कुंभकर्णी नींद
स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) गांधीनगर तक मामला पहुंचाया गया कोई ठोस रेड नहीं

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। जनता का सवाल है कि जब एलसीबी (LCB) के पी.आई. और उच्च अधिकारियों को सब पता है, तो तंत्र आखिर किसके इशारे पर मौन बैठा है? जिला पुलिस कप्तान (SP) इस गंभीर मुद्दे पर चुप क्यों हैं?

अब देखना यह होगा कि गांधीनगर की स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) या जिले के आला अधिकारी इस केमिकल के अड्डों और जुआघरों पर कब ‘सरप्राइज रेड’ करते हैं और हफ्ताखोरी के इस बड़े नेक्सस का पर्दाफाश कब होता है। जनता की नजरें अब सीधे पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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