कोलकाता : विशेष संवाददाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की आग अब खुलकर सामने आ गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के कई मौजूदा विधायकों और पार्षदों (काउन्सिलरों) ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावती तेवर अपना लिए हैं, जिससे राज्य सरकार और संगठन में हड़कंप मच गया है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार, बगावत करने वाले इन विधायकों और पार्षदों की संख्या काफी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। इन नेताओं का आरोप है कि पार्टी में उनकी अनदेखी की जा रही थी और स्थानीय प्रशासन व विकास कार्यों में उनके सुझावों को दरकिनार किया जा रहा था। इस अंदरूनी कलह और असंतोष ने अब एक बड़े विद्रोह का रूप ले लिया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि ये बागी नेता आगामी दिनों में किसी बड़े राजनीतिक दल का दामन थाम सकते हैं या अपनी नई रणनीति का एलान कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी स्थानीय और आम चुनावों से ठीक पहले टीएमसी के भीतर हुआ यह विद्रोह ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। यदि इस बगावत को समय रहते नहीं संभाला गया, तो कई नगर निगमों और विधानसभा क्षेत्रों में सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। फिलहाल, ममता बनर्जी और टीएमसी के शीर्ष रणनीतिकारों ने डैमेज कंट्रोल के लिए आपातकालीन बैठकें बुलाना शुरू कर दिया है। अब देखना यह होगा कि दीदी अपने इस किले को ढहने से बचाने के लिए क्या कदम उठाती हैं और इन बागी विधायकों-पार्षदों का अगला कदम क्या होता है।

