चेन्नई/अहमदाबाद : भारतीय राजनीति में जब भी बड़े बदलाव की बात होती है, तो अक्सर राजनीतिक पंडितों की नज़रें पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों पर टिकी रहती हैं। लेकिन इस बार हवाओं का रुख दक्षिण की ओर मुड़ गया है। तमिलनाडु की राजनीति में वह ‘खेला’ हो गया है जिसकी कल्पना बड़े-बड़े दिग्गजों ने नहीं की थी। महज एक साल पहले अपनी पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) बनाने वाले सुपरस्टार विजय अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे निकल चुके हैं।
सिनेमा के पर्दे से सत्ता की कुर्सी तक
तमिल सिनेमा के ‘थलपति’ कहे जाने वाले विजय ने जब अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान किया था, तब कई लोगों ने इसे केवल एक फिल्मी सितारे की महत्वाकांक्षा माना था। लेकिन ज़मीनी स्तर पर उनकी सक्रियता और हालिया घटनाक्रमों ने यह साफ कर दिया है कि उन्होंने द्रविड़ राजनीति के गढ़ में सेंध लगा दी है। उनकी रैलियों में उमड़ता जनसैलाब अब वोटों के समीकरण में बदलता नज़र आ रहा है।
विपक्ष पस्त, विजय का उदय
जहाँ एक ओर कांग्रेस अपनी खोई हुई ज़मीन तलाशने के लिए विजय के पिता एस. ए. चंद्रशेखर के प्रस्तावों की ओर देख रही है, वहीं दूसरी ओर विजय ने सीधे तौर पर जनता से संवाद कर स्थापित राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है। तमिलनाडु, जो दशकों से DMK और AIADMK के बीच बँटा रहा है, अब एक तीसरे विकल्प के रूप में विजय को स्वीकार करने की ओर बढ़ता दिख रहा है।
क्या विजय बदलेंगे तमिलनाडु की किस्मत?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की साफ-सुथरी छवि और युवाओं के बीच उनकी ज़बरदस्त पकड़ उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचा सकती है। यदि वर्तमान रुझान और गठबंधन की चर्चाएँ हकीकत में बदलती हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब तमिलनाडु की कमान एक ऐसे नायक के हाथ में होगी जिसने केवल एक साल में पूरी बिसात पलट दी।
महानगर मेट्रो का सवाल: क्या विजय तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को खत्म कर एक नए युग की शुरुआत कर पाएंगे?

