सोनीपत/दिल्ली: बंगाल चुनाव के नतीजों ने जहाँ एक ओर भाजपा खेमे में जश्न का माहौल पैदा कर दिया है, वहीं दूसरी ओर किसान नेता राकेश टिकैत ने इन परिणामों पर ‘अविश्वास’ जताते हुए बड़ा हमला बोला है। सोनीपत पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हार’ करार दिया है।
“बेईमानी की जीत हुई है” – टिकैत का सीधा प्रहार
मीडिया से मुखातिब होते हुए राकेश टिकैत ने बिना किसी लाग-लपेट के चुनाव परिणामों को ‘बेईमानी का नतीजा’ बताया। उन्होंने कहा कि देश में मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि “बेईमानी करके कुछ भी हासिल किया जा सकता है।” टिकैत ने आरोप लगाया कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों को मतदान करने से रोका गया और वोटों की लूट हुई।
ममता की लड़ाई को सराहा
भले ही आंकड़ों में ममता बनर्जी पीछे छूटती नजर आ रही हों, लेकिन टिकैत ने उनके जज्बे की तारीफ की। उन्होंने कहा:
अकेली जंग: ममता बनर्जी ने जिस तरह विपरीत परिस्थितियों में केंद्र की पूरी मशीनरी से लोहा लिया, वह काबिले तारीफ है।
लोकतंत्र पर खतरा: चुनाव में हार-जीत मायने नहीं रखती, लेकिन जिस तरह से ‘धांधली’ कर नतीजे बदले गए, वह लोकतांत्रिक भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।
सियासी हलकों में मचा हड़कंप
राकेश टिकैत का यह बयान तब आया है जब भाजपा बंगाल में ऐतिहासिक बढ़त के दावे कर रही है। टिकैत के इस ‘बेईमानी’ वाले बयान ने विपक्षी दलों को एक नया मुद्दा दे दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकैत का यह रुख आने वाले दिनों में किसान आंदोलन और चुनावी राजनीति के बीच के तनाव को और ज्यादा बढ़ा सकता है।
“बंगाल में जनता की राय नहीं, बल्कि सिस्टम की मनमानी चली है। ममता के वोट पड़ने ही नहीं दिए गए, फिर भी उन्होंने जबरदस्त लड़ाई लड़ी।” – राकेश टिकैत (किसान नेता)
मेट्रो कॉलम: सवाल जो खड़े हुए
1 क्या वाकई बंगाल चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई जैसा टिकैत दावा कर रहे हैं?
2 क्या हार के बाद विपक्षी खेमे में ‘ईवीएम’ और ‘धांधली’ का पुराना राग फिर से अलापा जाएगा?
3 क्या टिकैत का यह बयान किसान आंदोलन की अगली रणनीति का हिस्सा है?
महानगर मेट्रो न्यूज़ ब्यूरो की रिपोर्ट।

