कोलकाता | विशेष संवाददाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक संकट गहरा गया है। भाजपा की प्रचंड जीत के बावजूद, निवर्तमान मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपनी हार स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने कड़े तेवर दिखाते हुए ऐलान किया है कि वह इस्तीफा देने के लिए ‘लोकभवन’ नहीं जाएंगी।
“मैं दबाव में झुकने वाली नहीं”
राजभवन जाकर इस्तीफा देने की परंपरा को दरकिनार करते हुए ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की हार नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश है।
“मैं इस्तीफा देने के लिए लोकभवन नहीं जाऊंगी क्योंकि हम मानते ही नहीं कि हम हारे हैं। सच तो यह है कि हमें ‘हारने के लिए मजबूर’ किया गया है। अगर यह एक निष्पक्ष हार होती, तो मैं अब तक इस्तीफा दे चुकी होती। लेकिन अगर कोई सोचता है कि मैं दबाव में आकर झुक जाऊंगी, तो वह कभी नहीं होगा।”
: ममता बनर्जी, अध्यक्ष, TMC
संवैधानिक संकट की आहट?
ममता बनर्जी के इस स्टैंड ने बंगाल में एक नया संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है। चुनाव नतीजों में बहुमत का आंकड़ा पार करने वाली पार्टी (भाजपा) अब सरकार बनाने का दावा पेश करने की तैयारी में है, लेकिन मुख्यमंत्री का इस्तीफा देने से इनकार करना राज्य की राजनीति को संघर्ष की ओर ले जा रहा है।
ममता बनर्जी के मुख्य आरोप:
चुनावी प्रक्रिया में धांधली और केंद्रीय मशीनरी का दुरुपयोग।
जनता के असली जनादेश को ‘बलात’ बदलने का प्रयास।
दबाव की राजनीति के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प।
भाजपा का रुख: “जनादेश का अपमान कर रही हैं दीदी”
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी के इस फैसले की कड़ी निंदा की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी हार को पचा नहीं पा रही हैं और संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रही हैं। भाजपा ने मांग की है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए उन्हें तुरंत पद छोड़ देना चाहिए।
बंगाल की राजनीति अब गलियों से निकलकर राजभवन और अदालतों के दरवाजों तक पहुँच सकती है। क्या ममता बनर्जी का यह ‘विद्रोही’ रुख उन्हें फिर से सत्ता की लड़ाई में खड़ा करेगा, या यह उनके राजनीतिक भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बनेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

