चेन्नई/विशेष संवाददाता : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने न केवल राज्य की सियासत बदली है, बल्कि ‘थलापति’ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने मानवता और कृतज्ञता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। विजय ने अपने बरसों पुराने वफादार ड्राइवर राजेंद्रन के बेटे सबरीनाथन को चुनावी मैदान में उतारकर जो भरोसा जताया था, आज वह ‘जीत’ के ऐतिहासिक कीर्तिमान में बदल गया है।
भावुक कर देने वाला सफर: स्टेयरिंग से सत्ता के गलियारे तक
जब सुपरस्टार विजय ने टिकटों का बंटवारा किया था, तब हर कोई हैरान था कि उन्होंने एक साधारण ड्राइवर के बेटे को उम्मीदवार बनाया है। उस समय पिता राजेंद्रन और पुत्र सबरीनाथन दोनों ही अपने आंसू नहीं रोक पाए थे। आज जब चुनाव परिणाम आए, तो सबरीनाथन ने भारी मतों से जीत दर्ज कर साबित कर दिया कि जनता को ‘नाम’ नहीं, ‘नेक नीयत’ पसंद है।
वफादारी का सबसे बड़ा ईनाम
राजेंद्रन पिछले कई दशकों से साये की तरह विजय के साथ रहे हैं। विजय ने अपने इस फैसले से यह संदेश दिया है कि उनकी पार्टी में वंशवाद या रसूख नहीं, बल्कि मेहनत, ईमानदारी और वफादारी ही सफलता की असली चाबी है। एक ड्राइवर के बेटे का विधायक (MLA) बनना भारतीय लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत तस्वीर पेश करता है।
सियासी गलियारों में चर्चा: “यही है असली थलापति स्टाइल”
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय ने इस एक दांव से तमिलनाडु के आम जनमानस का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ कह रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो नेता अपने साथ काम करने वाले साधारण कर्मचारी के परिवार को सत्ता के शिखर पर बिठा सकता है, वह राज्य की आम जनता के भविष्य को भी सुरक्षित रख सकता है।
महानगर मेट्रो की कलम से…
अक्सर देखा जाता है कि राजनीति में टिकट केवल खास करीबियों या धनवानों को मिलते हैं, लेकिन विजय ने ‘सबरीनाथन’ को चुनकर यह साबित कर दिया कि “सिंहासन उसी का होगा, जो हकदार होगा।” एक ड्राइवर का बेटा अब विधानसभा में जनता की आवाज बनेगा—यह केवल एक जीत नहीं, एक नए युग की शुरुआत है।
विजय की TVK ने दिखा दिया: वफादारी का कर्ज चुकाने के लिए बड़े दिल की जरूरत होती है!

