पवन माकन : ग्रुप एडिटर महानगर मेट्रो : मोहब्बत क्या है? क्या यह सिर्फ दो शब्दों का मिलन है या दो रूहों का एक अनकहा सफर? अक्सर हम प्यार को खुशियों और मुलाकातों में ढूंढते हैं, लेकिन असल मोहब्बत तो वह है जो इंसान की आवाज़ से शुरू होकर उसकी खामोशी में भी सुकून तलाश ले। आज के भागदौड़ भरे दौर में, जहाँ रिश्ते मतलब की बुनियाद पर टिके हैं, वहां ‘निस्वार्थ प्रेम’ की एक अनूठी परिभाषा इन पंक्तियों में सिमटी नज़र आती है।
आवाज़ से खामोशी का सफर
सच्चा प्रेम केवल मीठी बातों का मोहताज नहीं होता। जब आप किसी से प्रेम करते हैं, तो आपको उसकी चहकती हुई आवाज़ जितनी प्रिय लगती है, उतनी ही उसकी ‘खामोशी’ પણ दिल को छू जाती है। वह मौन, जिसमें शब्द नहीं होते, पर एहसास गहरा होता है।
तकरार में भी छिपी है चाहत
रिश्तों में नोक-झोंक होना लाज़मी है। लेख की गहराई तब समझ आती है जब प्रेमी कहता है— “मेरा गुस्सा होना और तुम्हारा मुझे मना लेना, इस अहसास से प्यार है मुझे।” यह मनाना ही तो वह धागा है जो टूटने की कगार पर खड़े रिश्ते को फिर से मज़बूती से बांध देता है। गुस्सा नफरत नहीं, बल्कि हक जताने का
एक तरीका है।
जुदाई के आंसू भी हैं गवाह
अक्सर लोग मिलने की खुशी को तो प्यार मानते हैं, लेकिन बिछड़ने के गम से भागते हैं। पर गौर कीजिए— “मिलने की खुशी से लेकर बिछड़ने के आंसुओं तक प्यार है मुझे।” यह पंक्ति दर्शाती है कि प्यार केवल सुख का साथी नहीं है। बिछड़ने पर गिरने वाला हर आंसू उस इंसान की अहमियत बयां करता है। वह दर्द भी प्यारा है, क्योंकि वह ‘उसका’ दिया हुआ है।
उपस्थिति से यादों तक का घेरा
जब वह शख्स पास हो, तो दुनिया हसीन लगती है, लेकिन जब वह दूर हो, तो उसकी ‘यादें’ ही जीने का सहारा बन जाती हैं। तुम्हारी यादों का वह साया, जो हर पल साथ रहता है, वही तो वफा की असली पहचान है।
महानगर मेट्रो विचार
अंतत :, प्रेम किसी मापदंड का नाम नहीं है। यह तो एक समर्पण है जो कहता है— “बस तुमसे ही प्रेम है मुझे।” चाहे हालात जो भी हों, दूरी कितनी भी हो, अगर दिल की धड़कन में एक ही नाम गूंजता रहे, तो समझ लीजिए कि आपने प्रेम के सर्वोच्च शिखर को छू लिया है।
“मोहब्बत वह नहीं जो दुनिया को दिखाई जाए, मोहब्बत वह है जो रूह में उतार ली जाए।”

