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गोंडल में ‘कानून’ नतमस्तक! थाने नहीं, ‘बापू’ के दरबार में हाजिरी भरने जाती है पुलिस

नियमों की धज्जियां : आरोपी को जाना चाहिए जेल या थाना, पर यहाँ खाकी खुद चल कर आती है ‘साहब’ के द्वार

महानगर मेट्रो विशेष विश्लेषण : गोंडल : कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन राजकोट जिले के गोंडल में लगता है कानून के हाथ ‘सत्ता और रसूख’ के आगे छोटे पड़ गए हैं। गोंडल में ‘बापू’ (जडेजा समूह) का दबदबा इस कदर हावी है कि यहाँ खाकी की मर्यादा तार-तार हो रही है। कायदे के मुताबिक, जिस आरोपी को अपनी हाजिरी दर्ज कराने थाने जाना चाहिए, उसके घर पुलिस खुद फाइल लेकर पहुँच रही है।

थाना हुआ दूर, ‘दरबार’ हुआ मंजूर

नियम कहता है कि अगर किसी आरोपी को शर्त के आधार पर जमानत मिली है या उसकी नियमित हाजिरी अनिवार्य है, तो उसे पुलिस स्टेशन जाकर रजिस्टर में हस्ताक्षर (Sign) करने होते हैं। लेकिन गोंडल का मंजर कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। यहाँ रसूखदार आरोपियों का पुलिस स्टेशन जाना तो दूर, पुलिस के जवान खुद प्रोटोकॉल तोड़कर ‘साहब’ के बंगले पर हाजिरी लेने पहुँचते हैं।

सवाल यह है कि क्या गोंडल में गुजरात पुलिस का मैन्युअल बदल गया है? या फिर वर्दी पर ‘खादी’ का प्रभाव इतना गहरा है कि पुलिसकर्मी अब अर्दली की भूमिका में आ गए हैं?

दबदबा ऐसा कि सिस्टम मौन

स्थानीय चर्चाओं की मानें तो यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है। आम आदमी के लिए डंडा चलाने वाली पुलिस, इन ‘बाहुबलियों’ के सामने भीगी बिल्ली बनी नजर आती है। जब आरोपी को थाने बुलाने की हिम्मत पुलिस नहीं जुटा पाती, तो आम जनता की सुरक्षा का भरोसा किस पर टिकी है? यह घटना सीधे तौर पर प्रशासन की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़ा करती है।

महानगर मेट्रो के तीखे सवाल:

एसपी और उच्च अधिकारी चुप क्यों? क्या उन्हें नहीं पता कि उनके मातहत कर्मचारी कहाँ हाजिरी भर रहे हैं?

क्या कानून सबके लिए बराबर है? अगर एक आम नागरिक साइन करने न जाए तो पुलिस उसे घसीटकर ले आती है, फिर यहाँ ‘स्पेशल सर्विस’ क्यों?
वर्दी की गरिमा का क्या? क्या पुलिस अब निजी सुरक्षा गार्ड या रिकवरी एजेंट की तरह रसूखदारों के इशारे पर काम करेगी?

जनता में आक्रोश

सोशल मीडिया और गलियारों में इस ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ की तस्वीरें और खबरें वायरल होने के बाद जनता में भारी रोष है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या गोंडल में लोकतंत्र की जगह अब भी ‘रियासत’ का कानून चलता है? अगर पुलिस खुद चलकर आरोपी के घर सिग्नेचर लेने जाएगी, तो अपराधियों के मन में कानून का खौफ कैसे पैदा होगा?

ब्यूरो रिपोर्ट: महानगर मेट्रो

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