अहमदाबाद ग्रामीण कोर्ट का बड़ा फैसला : 10 महीने जेल में रहे थे कुणाल
महानगर मेट्रो ब्यूरो, अहमदाबाद : शहर के आनंदनगर इलाके में साल 2016 में हुई चर्चित आत्महत्या की घटना में अहमदाबाद ग्रामीण कोर्ट ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सचिन टावर की 10वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने वाली भूमि देसाई के मामले में आरोपी पति और शहर के मशहूर आर.जे. कुणाल (कुणाल ईश्वरभाई देसाई) को कोर्ट ने सभी आरोपों से निर्दोष बरी कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
जनवरी 2016 में यह घटना उस वक्त सुर्खियों में आई थी, जब आनंदनगर स्थित सचिन टावर से भूमि देसाई ने छलांग लगा दी थी। घटना के बाद भूमि के परिजनों ने कुणाल देसाई पर मानसिक प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी क्योंकि कुणाल उस समय रेडियो जगत का एक जाना-माना चेहरा थे।
10 महीने तक रहे जेल की सलाखों के पीछे
इस केस की जांच के दौरान पुलिस ने कुणाल देसाई को गिरफ्तार किया था। कुणाल को इस मामले में लगभग 10 महीने जेल में बिताने पड़े थे। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें जमानत मिली थी। कोर्ट में चले लंबे ट्रायल के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और साक्ष्यों (Evidence) का बारीकी से अध्ययन किया गया।
कोर्ट का फैसला : ‘आरोप साबित करने में अभियोजन विफल’
अहमदाबाद ग्रामीण कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) कुणाल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। गवाहों के बयानों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने कुणाल देसाई को ‘बेगुनाह’ मानते हुए केस से बरी कर दिया।
मुख्य अंश
घटना: जनवरी 2016, आनंदनगर (सचिन टावर)।
आरोप: आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना)।
नतीजा: 8 साल बाद कोर्ट ने दी क्लीन चिट।
वर्तमान स्थिति: कोर्ट के इस फैसले से कुणाल देसाई और उनके परिवार ने राहत की सांस ली है।

