Homeआर्टिकलसलाखों के पीछे 13 महीनों से जारी है प्रायश्चित की अनूठी साधना

सलाखों के पीछे 13 महीनों से जारी है प्रायश्चित की अनूठी साधना

महानगर संवाददाता : जेल की चारदीवारी अक्सर अपराध और अफसोस की गवाह बनती है, लेकिन कभी-कभी यहीं से आत्म-सुधार की एक नई कहानी भी शुरू होती है। अपने ही पति की हत्या के आरोप में जेल की सजा काट रही मुस्कान के जीवन में पिछले कुछ महीनों में ऐसा ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कल तक जो महिला कानूनी दांव-पेंचों और अपराध की सुर्खियों में थी, आज वह पूरी तरह ईश्वर की भक्ति में लीन हो चुकी है।

भजन-कीर्तन और रुद्राक्ष की माला

जेल सूत्रों के अनुसार, पिछले 13 महीनों से मुस्कान की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। वह अब अपना अधिकांश समय जेल के भीतर बने प्रार्थना स्थल पर बिताती है। दिन-रात पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं में उसकी सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। हाथों में रुद्राक्ष की माला जपना और ध्यान लगाना अब उसकी पहचान बन गया है।

कैदियों के बीच बनीं प्रेरणा

मुस्कान केवल खुद ही भक्ति नहीं कर रही, बल्कि वह अन्य महिला कैदियों के साथ भी धार्मिक संवाद करती है। जेल प्रशासन का कहना है कि उसके व्यवहार में आए इस सकारात्मक बदलाव से जेल का वातावरण भी शांत हुआ है। संगीत और भजनों के माध्यम से वह अपने अतीत के बोझ को कम करने और मानसिक शांति प्राप्त करने की कोशिश कर रही है।

प्रायश्चित या वैराग्य?

मुस्कान के इस आध्यात्मिक मार्ग को उसके पश्चाताप के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जब इंसान के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचता और कानून का शिकंजा कस जाता है, तब अक्सर अध्यात्म ही उसे सहारा देता है। 13 महीनों की यह निरंतर साधना क्या उसे समाज और स्वयं की नजरों में फिर से खड़ा कर पाएगी, यह तो वक्त ही बताएगा।

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